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Meerut News: मेरठ की रेवड़ी-गजक को मिलेगा सरकारी सहारा, कारोबार बढ़ाने पर 50 लाख तक सब्सिडी
Meerut News: मेरठ के रेवड़ी-गजक कारोबार को उद्योग विस्तार के लिए सरकारी मदद मिलेगी। ओडीओपी योजना में परियोजना लागत के आधार पर 50 लाख तक सब्सिडी।
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Meerut News: मेरठ की रेवड़ी और गजक अब सिर्फ सर्दियों की मिठास तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार की नई पहल से इस पारंपरिक कारोबार को उद्योग के रूप में विस्तार देने का रास्ता खुल गया है। एक जनपद एक व्यंजन (ओडीओसी) वित्तपोषण सहायता योजना के तहत रेवड़ी-गजक कारोबारियों को नई इकाई लगाने और मौजूदा कारोबार का विस्तार करने के लिए ऋण के साथ भारी सब्सिडी भी मिलेगी। परियोजना की लागत के आधार पर यह अनुदान अधिकतम 50 लाख रुपये तक हो सकता है।
जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के माध्यम से संचालित योजना का मकसद मेरठ के पारंपरिक व्यंजन कारोबार को संगठित और आधुनिक स्वरूप देना है। इससे छोटे कारोबारी मशीनरी, आधुनिक पैकेजिंग और उत्पादन क्षमता बढ़ाकर अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार से बाहर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकेंगे।
बिना बड़ी डिग्री के भी मिलेगा मौका
योजना की खास बात यह है कि इसके लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं है। 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि योजना का लाभ आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य को केवल एक बार मिलेगा। साथ ही आवेदक अथवा परिवार के सदस्य द्वारा पहले किसी अन्य सरकारी स्वरोजगार योजना का लाभ न लिया होना भी जरूरी है।
परियोजना के हिसाब से तय होगी सब्सिडी
25 लाख रुपये तक की परियोजना पर लागत का 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम 6.25 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी। 25 से 50 लाख रुपये की परियोजना पर 10 प्रतिशत अथवा अधिकतम 6.25 लाख रुपये का अनुदान तय किया गया है।
50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक की परियोजना पर 20 प्रतिशत अथवा अधिकतम 10 लाख रुपये, जबकि 1.5 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजना पर 10 प्रतिशत अथवा अधिकतम 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी।
उपायुक्त उद्योग अमरेश कुमार पांडे के अनुसार, योजना में लाभार्थियों के लिए अंशदान की शर्त भी आसान रखी गई है। सामान्य श्रेणी के लोगों को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत स्वयं लगाना होगा, जबकि अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, महिला और दिव्यांग लाभार्थियों के लिए यह अंशदान केवल पांच प्रतिशत रखा गया है।
सरकारी सहायता मिलने से मेरठ की पहचान बन चुके रेवड़ी-गजक कारोबार को नई उड़ान मिलने और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।


