Meerut News: मेरठ में कुलपति ने छोड़ी सरकारी गाड़ी, ई-रिक्शा से पहुंचे दफ्तर

Meerut News: मेरठ के खेल विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल दीप अहलावत ई-रिक्शा से दफ्तर पहुंचे। उन्होंने ईंधन बचत को राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया।

Sushil Kumar
Published on: 16 May 2026 9:56 PM IST
Vice Chancellor reaches office in Meerut by abandoned government vehicle, e-rickshaw
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मेरठ में कुलपति ने छोड़ी सरकारी गाड़ी, ई-रिक्शा से पहुंचे दफ्तर (Photo- Newstrack)

Meerut News: मेरठ, 16 मई। बढ़ते प्रदूषण, ऊर्जा संकट और पर्यावरण संरक्षण की चिंता के बीच शनिवार को एक अलग तस्वीर देखने को मिली। मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति मेजर जनरल दीप अहलावत (सेवानिवृत्त) सरकारी वाहन के बजाय ई-रिक्शा से कार्यालय पहुंचे। उनका यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला रहा, बल्कि आम लोगों को ईंधन बचत के प्रति जागरूक करने की पहल भी माना जा रहा है।

कुलपति ई-रिक्शा से कार्यालय पहुंचे

खेल विश्वविद्यालय का प्रशासनिक कार्यालय फिलहाल Sardar Vallabhbhai Patel University of Agriculture and Technology परिसर से संचालित हो रहा है। विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर सालावा में निर्माणाधीन है। शनिवार सुबह जब कुलपति ई-रिक्शा से कार्यालय पहुंचे तो विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी कुछ देर के लिए हैरान रह गए। बाद में जब उन्होंने इसके पीछे का उद्देश्य बताया तो कर्मचारियों ने उनकी पहल की सराहना की।

ईंधन बचाना अब राष्ट्रीय जिम्मेदारी

कुलपति ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi लगातार ईंधन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच ईंधन बचत अब केवल व्यक्तिगत जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि सक्षम लोग भी छोटी दूरी के लिए सार्वजनिक या वैकल्पिक परिवहन का उपयोग करें तो पेट्रोल-डीजल की खपत कम की जा सकती है।

मेजर जनरल दीप अहलावत ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विश्वविद्यालयों को समाज के सामने व्यवहारिक उदाहरण भी प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन जैसे विकल्प अपनाकर प्रदूषण कम किया जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया जा सकता है।

विश्वविद्यालय के कई कर्मचारियों ने भी कुलपति की पहल को प्रेरणादायक बताया। कर्मचारियों का कहना था कि यदि उच्च पदों पर बैठे लोग इस तरह का संदेश देंगे तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से देखने को मिलेगा।

Shashi kant gautam

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