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फांसी की सजा के बाद मुस्कान ने छोड़ा नवरात्रि व्रत, जेल प्रशासन ने बताई पूरी बात
मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में फांसी की सजा पाने वाली मुस्कान ने इस बार नवरात्रि का व्रत नहीं रखा। जानिए जेल प्रशासन ने क्या बताया, बेटी से मुलाकात और अपील को लेकर क्या है अपडेट।
Muskan and Sahil in Meerut Jail (AI Representative Image)
मेरठ: सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान की जेल में दिनचर्या चर्चा में है। पिछले नवरात्र में धार्मिक गतिविधियों में शामिल रहने वाली मुस्कान ने इस बार न तो व्रत रखा और न ही पहले की तरह पूजा-पाठ किया। मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में यह उसका दूसरा नवरात्र था। इस बार उसकी 10 महीने की बेटी भी नवरात्र के दौरान उसके साथ जेल में रही। हालांकि, मुस्कान के व्रत नहीं रखने के पीछे की वजह जेल प्रशासन ने स्पष्ट नहीं की है।
इस बीच जेल में नवरात्र के समापन पर कन्या पूजन कराया गया। जेल प्रशासन के मुताबिक, नवरात्र के दौरान 32 महिला बंदियों और कैदियों ने व्रत रखा। व्रत रखने वाली महिलाओं को नियमानुसार पूजा सामग्री उपलब्ध कराई गई। सोमवार को चार कन्याओं को विधिवत भोजन कराया गया। इनमें मुस्कान की बेटी भी शामिल रही। कन्या पूजन के बाद व्रत रखने वाली महिलाओं ने अपना व्रत पूरा किया।
फांसी की सजा के बाद मुस्कान की बदली दिनचर्या
सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत से मृत्युदंड मिलने के बाद मुस्कान की धार्मिक गतिविधियों में बदलाव सामने आया है। जेल में पिछले नवरात्र के दौरान वह धार्मिक परंपराओं में शामिल रही थी, लेकिन इस बार उसने व्रत नहीं रखा और पूजा-पाठ से भी दूरी बनाए रखी। हालांकि, इस बदलाव को लेकर जेल प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अनुसार, जेल में बंद महिलाओं को नियमों के तहत धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने की सुविधा दी गई। व्रत रखने वाली महिला बंदियों और कैदियों के लिए आवश्यक सामग्री की व्यवस्था भी की गई थी। जेल प्रशासन के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया सुरक्षा और जेल के अनुशासन संबंधी नियमों के तहत संपन्न कराई गई।
बेटी से मिलने की इच्छा, सिलाई-कढ़ाई का काम चुना
मृत्युदंड की सजा के बाद मुस्कान अब आगे की कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रही है। जेल प्रशासन के मुताबिक, उसने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए निजी वकील उपलब्ध कराने की मांग की है। आवेदन पर नियमानुसार प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
जेल में काम के विकल्पों में मुस्कान ने सिलाई-कढ़ाई का काम चुना है, जबकि साहिल शुक्ला खेती-किसानी से जुड़ा काम कर रहा है। जेल प्रशासन दोनों की गतिविधियों पर निगरानी रख रहा है। मुस्कान की बेटी से मुलाकात की इच्छा भी इस मामले में चर्चा का विषय बनी हुई है।
13 महीने की सुनवाई के बाद सुनाई गई फांसी की सजा
मेरठ के चर्चित ‘ब्लू ड्रम हत्याकांड’ में जिला अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया था। इससे पहले 30 सितंबर को अदालत ने दोनों को सौरभ राजपूत की हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराया था।
करीब 13 महीने चली सुनवाई में 126 तारीखें पड़ीं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाह पेश किए गए। पुलिस जांच में फोरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोगों के बयान अहम साक्ष्य बने। अभियोजन पक्ष ने वारदात की गंभीरता और सबूत छिपाने की कोशिशों का हवाला देते हुए इसे दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में रखने की दलील दी थी।
सौरभ राजपूत की मार्च 2025 में हत्या कर दी गई थी। उनका शव क्षत-विक्षत हालत में नीले प्लास्टिक के ड्रम में सीमेंट के साथ छिपाया गया था। इस घटना ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं।
क्या अब तुरंत होगी फांसी? अभी बाकी हैं कानूनी पड़ाव
मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सजा पर तुरंत अमल हो जाएगा। कानून के तहत मृत्युदंड की पुष्टि इलाहाबाद हाईकोर्ट से होना जरूरी है। दोषी अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए अपील कर सकते हैं। इसके बाद परिस्थितियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में अपील और दया याचिका जैसे कानूनी विकल्प भी उपलब्ध हो सकते हैं।
जेल प्रशासन के स्तर पर भी आगे की प्रक्रिया कानूनी स्थिति और निर्धारित नियमों के अनुसार होगी। पुरुष बंदियों को आगरा सेंट्रल जेल और महिला बंदियों को लखनऊ की संबंधित महिला जेल में स्थानांतरित करने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। हालांकि, स्थानांतरण कब होगा, यह उपलब्धता और संबंधित प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
फिलहाल मुस्कान और साहिल के मामले में अगला अहम कदम निचली अदालत के मृत्युदंड संबंधी फैसले को चुनौती देने और हाईकोर्ट में उसकी पुष्टि की कानूनी प्रक्रिया है।


