TRENDING TAGS :
Meerut Parshad Interview: मेरठ के वार्ड 27 में क्या बदला? पार्षद प्रदीप ने दिए 25 सवालों के जवाब
Meerut Ward 27 Parshad Interview: मेरठ के वार्ड 27 के पार्षद प्रदीप से 25 सवालों में जानिए सड़क, जलभराव और विकास की स्थिति। प्रदीप ने सांसद अरुण गोविल और विधायक अमित अग्रवाल को 10 में जीरो नंबर देने की वजह भी बताई।
Meerut Nagar Nigam Ward 27 Parshad Pradeep Interview Newstrack Hindi | Uttar Pradesh Latest News
Meerut Ward 27 Parshad Interview: पल्लवपुरम फेज-1 में सड़क और जलभराव की समस्या को लेकर वार्ड 27 के पार्षद प्रदीप का तेवर तल्ख है। वर्ष 2013 से राजनीति में सक्रिय प्रदीप ने अपना राजनीतिक सफर बसपा से शुरू किया था और पहली बार बसपा के टिकट पर पार्षद बने। इस बार उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के टिकट पर चुनाव जीता। अब पार्षद के रूप में उनकी सबसे बड़ी चुनौती अपने ही वार्ड में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल तस्वीर बदलना है। उनका दावा है कि पल्लवपुरम फेज-1 में करीब 15 साल से विकास के नाम पर ‘‘एक रुपये का भी काम’’ नहीं हुआ। खराब सड़कें और बरसात में जलभराव को वह वार्ड की सबसे बड़ी समस्याओं में गिनाते हैं।
2013 से राजनीति, दल बदला लेकिन सक्रियता जारी
प्रदीप वर्ष 2013 से राजनीति में हैं। उन्होंने शुरुआत बसपा से की थी। बसपा के साथ रहते हुए पहली बार पार्षद का चुनाव जीता और नगर निगम में वार्ड का प्रतिनिधित्व किया। बाद में राजनीतिक सफर राष्ट्रीय लोकदल के साथ आगे बढ़ाया। इस बार RLD के टिकट पर चुनाव जीतकर वह दोबारा पार्षद बने हैं।
उनके लिए राजनीति का मतलब स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच रहकर समस्याएं उठाना है। हालांकि, परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि, राजनीति में आने की प्रेरणा और पार्षद बनने के बाद किए गए पहले काम से जुड़े सवालों पर उन्होंने कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया।
सड़क खराब, बारिश में पानी का संकट
वार्ड की सबसे बड़ी समस्या पूछने पर प्रदीप का जवाब दो मुद्दों पर आकर टिकता है—सड़क और जलभराव। उनका कहना है कि क्षेत्र की सड़कें खराब होती जा रही हैं। बरसात में जलभराव की समस्या लोगों की परेशानी और बढ़ा देती है।
पल्लवपुरम फेज-1 आवासीय क्षेत्र होने के बावजूद सड़क और जलनिकासी की समस्या को लेकर पार्षद सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बारिश के दौरान पानी की निकासी ठीक नहीं होने से लोगों को आवाजाही में परेशानी होती है। ऐसे में सड़क के साथ नालियों और जलनिकासी की व्यवस्था को भी प्राथमिकता से दुरुस्त किए जाने की जरूरत है।
‘15 साल से एक रुपये का भी काम नहीं’
प्रदीप के सबसे तीखे आरोप स्थानीय विकास को लेकर हैं। उनका दावा है कि उनके वार्ड में करीब 15 साल से विकास का कोई उल्लेखनीय काम नहीं हुआ। वह यहां तक कहते हैं कि ‘‘एक रुपये का भी काम नहीं हुआ।’’
उनका कहना है कि न सांसद निधि से और न विधायक निधि से वार्ड को अपेक्षित काम मिला। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आकलन और दावा है।
सांसद अरुण गोविल को जीरो नंबर
सांसद के कामकाज को 10 में से नंबर देने का सवाल आया तो प्रदीप ने कोई रियायत नहीं दी। उन्होंने सांसद अरुण गोविल को 10 में से जीरो नंबर दिए।
प्रदीप का आरोप है, ‘‘अरुण गोविल भी न तो किसी के बीच में जाते हैं और न काम कराते हैं।’’ उनका कहना है कि क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने के कारण वह सांसद को कोई नंबर देने के पक्ष में नहीं हैं।
विधायक अमित अग्रवाल भी ‘जीरो’
क्षेत्रीय विधायक अमित अग्रवाल के लिए भी प्रदीप का आकलन यही रहा। उन्होंने विधायक को भी 10 में से जीरो नंबर दिए। उनका कहना है कि उनके वार्ड में विकास कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
दोनों जनप्रतिनिधियों को जीरो नंबर देने के पीछे प्रदीप का मुख्य आधार वार्ड में विकास कार्यों की कमी है। यह पार्षद का व्यक्तिगत मूल्यांकन है।
अतुल प्रधान को बताया बेहतर विधायक
जिले में सबसे बेहतर विधायक के सवाल पर प्रदीप ने अपने क्षेत्र के विधायक का नाम लेने के बजाय सरधना के सपा विधायक अतुल प्रधान का नाम लिया। उन्होंने अतुल प्रधान को बेहतर विधायक बताया।
यह जवाब इसलिए भी राजनीतिक रूप से दिलचस्प है क्योंकि प्रदीप खुद RLD से जुड़े हैं, जबकि अतुल प्रधान समाजवादी पार्टी से विधायक हैं। यानी बेहतर विधायक के सवाल पर उन्होंने अपनी पार्टी के बजाय विपक्षी दल के विधायक का नाम लिया।
अब सड़क-जलभराव से तय होगी पार्षद की कसौटी
प्रदीप का राजनीतिक सफर एक ही पार्टी तक सीमित नहीं रहा। 2013 से राजनीति में सक्रिय रहने के बाद बसपा से पार्षद बने और अब RLD से वार्ड का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। लेकिन वार्ड की जनता के लिए पार्टी से ज्यादा अहम रोजमर्रा की समस्याएं हैं।
पल्लवपुरम फेज-1 में खराब सड़कें और बारिश के दौरान जलभराव ऐसे मुद्दे हैं, जिनसे लोगों का सीधा सामना होता है। पार्षद के सामने अब चुनौती सिर्फ नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठाने की नहीं, बल्कि अपने कार्यकाल में इन समस्याओं का समाधान कराने की भी है।
प्रदीप की राजनीति का तेवर साफ है—विकास के नाम पर समझौता नहीं और जनप्रतिनिधियों के काम का हिसाब जरूर। अब देखना यह होगा कि जिस वार्ड में वह 15 साल से काम नहीं होने का दावा कर रहे हैं, वहां उनके कार्यकाल में सड़क और जलभराव की तस्वीर कितनी बदलती है।


