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Meerut News: नौचंदी में बिखरा शायरी का जादू, ‘वाह-वाह’ की गूंज से देर रात तक महकता रहा पटेल मंडप
Meerut News: मेरठ के नौचंदी मेले में आयोजित ऑल इंडिया मुशायरे में मशहूर शायरों ने अपनी शायरी से समा बांध दिया। देर रात तक चले कार्यक्रम में वसीम बरेलवी, पॉपुलर मेरठी और अन्य शायरों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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Meerut News: ऐतिहासिक नौचंदी मेले की शुक्रवार की शाम अदब, तहज़ीब और शायरी के नाम रही। पटेल मंडप में आयोजित ऑल इंडिया मुशायरे ने ऐसा रंग जमाया कि रात गहराती गई, लेकिन श्रोताओं का उत्साह कम नहीं हुआ। मंच से निकले हर खूबसूरत शेर पर तालियों की गड़गड़ाहट और "वाह-वाह" की गूंज पूरे परिसर में सुनाई देती रही। ऐसा लगा मानो नौचंदी की फिजाओं में शायरी घुल गई हो।
जिला प्रशासन, प्रांतीयकृत मेला नौचंदी और सैफ फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य मुशायरे का आगाज़ बागपत सांसद राजकुमार सांगवान, राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र सिंह और शोभित यूनिवर्सिटी के चांसलर कुंवर शेखर विजेंद्र ने शमा रोशन कर किया। कार्यक्रम की सदारत देश के विख्यात शायर प्रो. वसीम बरेलवी ने की।मंच पर जब प्रो. वसीम बरेलवी ने पढ़ा— "उसूलों पर जहाँ आँच आए, टकराना ज़रूरी है..." तो पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। वहीं डॉ. नवाज देवबंदी ने हिंदू-मुस्लिम एकता और इंसानियत का संदेश देते हुए श्रोताओं का दिल जीत लिया। उनके शेर "आपके सीने में हिंदुस्तान होना चाहिए" पर देर तक दाद मिलती रही।
आलोक अविरल ने भूख और सामाजिक विषमता पर मार्मिक शेर सुनाकर सोचने पर मजबूर किया, जबकि डॉ. नदीम शाद ने रिश्तों की नाजुक भावनाओं को शब्दों में पिरोकर श्रोताओं को भावुक कर दिया। मशकूर मामनून कन्नौजी ने मां-बाप की सेवा को जन्नत का रास्ता बताया तो इकबाल अशहर और अज़हर इकबाल ने अपने असरदार अंदाज से महफिल को नई ऊंचाई दे दी।मुशायरे का सबसे खुशनुमा दौर तब आया जब हास्य-व्यंग्य के बेताज बादशाह डॉ. पॉपुलर मेरठी मंच पर पहुंचे। उनके व्यंग्य और चुटीले अंदाज पर श्रोता ठहाके लगाने को मजबूर हो गए। गंभीर शायरी के बीच हास्य का यह रंग महफिल को और यादगार बना गया।
हिमांशी बाबरा, चंदन राय, रियाज़ सागर, मोईन शादाब, अज़्म शाकिरी, फुरकान सरधनवी और हेमंत गौतम ने भी अपने बेहतरीन कलाम से मुशायरे में चार चांद लगा दिए। मंच संचालन रियाज़ सागर ने अपने दिलकश अंदाज में किया और पूरी महफिल को एक सूत्र में बांधे रखा।कन्वीनर फैज़ महमूद ने कहा कि नौचंदी मेले की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना इस आयोजन का उद्देश्य है। देर रात तक चले इस मुशायरे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि नौचंदी केवल मेला नहीं, बल्कि मेरठ की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है, जहां शायरी सिर्फ सुनी नहीं जाती, बल्कि महसूस भी की जाती है।


