Meerut News: खंडहर से फिर ज्ञान के केंद्र बनेंगे हॉस्टल, लौटेगी रौनक, छात्रों ने फैसले का स्वागत

Meerut News: मेरठ में लंबे समय से उपेक्षित हॉस्टलों के पुनर्विकास की तैयारी शुरू हो गई है। खंडहर बन चुके छात्रावास फिर से ज्ञान और शिक्षा के केंद्र बनेंगे। छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है।

Sushil Kumar
Published on: 14 Jun 2026 12:01 PM IST
Meerut News
X

Meerut News(Photo-Social Media)

Meerut News: कभी विद्यार्थियों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले कॉलेजों के छात्रावास अब एक बार फिर शिक्षा और प्रशिक्षण के केंद्र बनने जा रहे हैं। योगी सरकार ने एडेड और राजकीय डिग्री कॉलेजों के वर्षों से बंद पड़े और जर्जर हो चुके हॉस्टलों को नए स्वरूप में विकसित करने का फैसला किया है। इन भवनों में अब स्किल डेवलपमेंट सेंटर, लाइब्रेरी, प्रयोगशालाएं और अन्य शैक्षिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

उच्च शिक्षा विभाग की इस पहल से लंबे समय से बेकार पड़े सरकारी भवनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। साथ ही छात्रों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं और रोजगारपरक प्रशिक्षण का लाभ भी मिलेगा। विभागीय आंकड़ों के अनुसार मेरठ मंडल में करीब 30 और मेरठ शहर में पांच ऐसे छात्रावास हैं जो वर्षों से बंद पड़े हुए हैं। जिसके बाद छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है।

समय के साथ वीरान हो गए थे हॉस्टल

एक समय ऐसा था जब दूर-दराज के गांवों और कस्बों से आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए कॉलेज हॉस्टल सबसे बड़ी सुविधा माने जाते थे। 90 के दशक तक अधिकांश छात्रावास विद्यार्थियों से भरे रहते थे और उनमें शैक्षणिक माहौल बना रहता था। लेकिन समय के साथ निजी आवासों की उपलब्धता बढ़ी, रखरखाव की कमी हुई और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी सामने आईं। इसके चलते छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटती गई। धीरे-धीरे कई हॉस्टल पूरी तरह खाली हो गए और उनकी हालत खंडहर जैसी हो गई।

अब शिक्षा और रोजगार से जुड़ेंगे भवन

नई योजना के तहत कॉलेज प्रशासन अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इन भवनों का उपयोग कर सकेगा। इनमें कौशल विकास प्रशिक्षण, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी केंद्र और प्रशासनिक कार्यों से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इस पहल से कॉलेज परिसरों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और छात्रों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे उच्च शिक्षा संस्थानों में उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बी.एल. शर्मा ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को ऐसे सभी छात्रावासों का सर्वे कराने और उनकी उपयोगिता के अनुसार कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

छात्रों ने फैसले का किया स्वागत

इस फैसले को छात्रों ने सकारात्मक कदम बताया है। मेरठ कॉलेज के बीए अंतिम वर्ष के छात्र अनिरुद्ध सिंह का कहना है कि कई कॉलेजों में जगह की कमी के कारण नई सुविधाएं विकसित नहीं हो पाती हैं। यदि बंद पड़े हॉस्टलों में लाइब्रेरी और स्किल सेंटर शुरू किए जाते हैं तो छात्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। वहीं एनएएस कॉलेज की छात्रा साक्षी त्यागी का कहना है कि वर्तमान समय में रोजगारपरक प्रशिक्षण की सबसे अधिक आवश्यकता है। कॉलेज परिसर में ही स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनने से छात्राओं को बाहर जाकर प्रशिक्षण लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक अन्य छात्र सचिन चौधरी का मानना है कि सरकारी भवनों को यूं ही खंडहर बनने देने से बेहतर है कि उनका उपयोग शिक्षा और छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए किया जाए।

शिक्षा विशेषज्ञों ने बताया दूरदर्शी फैसला

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सरकारी परिसंपत्तियों के संरक्षण के साथ-साथ नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को भी मजबूती प्रदान करेगा। कौशल आधारित शिक्षा और रोजगारपरक प्रशिक्षण पर बढ़ते फोकस के बीच यह पहल कॉलेजों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो बंद पड़े भवन फिर से छात्रों की गतिविधियों से गुलजार हो सकेंगे और शिक्षा के नए केंद्र के रूप में विकसित होंगे।

एक बार फिर लौटेगी रौनक

लंबे समय से वीरान पड़े इन छात्रावासों में अब एक बार फिर विद्यार्थियों की मौजूदगी महसूस होने की उम्मीद है। हालांकि इस बार इन कमरों का उपयोग रहने के लिए नहीं बल्कि सीखने, कौशल विकसित करने और भविष्य संवारने वाली गतिविधियों के लिए किया जाएगा। योगी सरकार की यह पहल न केवल सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण बनेगी बल्कि हजारों छात्रों को आधुनिक शिक्षा और रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Sushil Kumar
ABOUT THE AUTHOR

Sushil Kumar

Next Story