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Meerut: पश्चिमी यूपी की राजनीति में बड़ा बदलाव, रोहित जाखड़ कांग्रेस में शामिल, जाट समीकरण पर नजर
Meerut News: रालोद के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहित जाखड़ ने सैकड़ों समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता ली, पश्चिमी यूपी में संगठन मजबूत करने की कवायद तेज।
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Meerut News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय जाट चेहरों में शामिल रोहित जाखड़ ने बुधवार को कांग्रेस का दामन थामकर प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी। राष्ट्रीय जाट महासंघ के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे जाखड़ ने नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। राजनीतिक जानकार इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने और जाट मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।
रोहित जाखड़ लंबे समय तक राष्ट्रीय लोकदल की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं। वह 'इंडिया' गठबंधन की समन्वय समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। रालोद के भाजपा के साथ गठबंधन के बाद उन्होंने पार्टी की नीतियों से असहमति जताते हुए इस्तीफा दे दिया था। किसान आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका और जाट समाज में उनकी पहचान उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का प्रभावशाली नेता बनाती है।
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम तथा ओबीसी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जय हिंद ने उनका स्वागत किया। पवन खेड़ा ने कहा कि रोहित जाखड़ के कांग्रेस में आने से पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी, जबकि राजेंद्र पाल गौतम ने दावा किया कि उनके जुड़ने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड में संगठन को मजबूती मिलेगी।
सदस्यता ग्रहण करने के बाद रोहित जाखड़ ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा, सामाजिक न्याय, किसान हितों और संविधान की रक्षा के संकल्प से प्रेरित होकर पार्टी का हाथ थामा है। उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं, पिछड़े वर्गों और वंचित समाज की आवाज को मजबूती देना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट राजनीति हमेशा से चुनावी समीकरणों का अहम हिस्सा रही है। ऐसे में रोहित जाखड़ का कांग्रेस में जाना आगामी चुनावों से पहले विपक्षी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जाखड़ अपने सामाजिक और किसान आधार को कांग्रेस के पक्ष में जोड़ने में सफल रहते हैं तो इसका असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर देखने को मिल सकता है।


