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Meerut Parshad Interview: मेरठ शताब्दीनगर का हाल! गड्ढे, जलभराव और गंदा पानी, पार्षद से 25 सवाल
Meerut Shatabdinagar Parshad Interview: मेरठ के वार्ड 31 शताब्दीनगर में टूटी सड़क, जलभराव, चोक नाले, कूड़े और गंदे पानी की समस्या को लेकर पार्षद कीर्ति घोपला ने सवाल उठाए। जानिए क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं।
Meerut Shatabdinagar Ward 31 Parshad Interview | Meerut Latest News in Hindi | Newstrack Hindi News
Meerut Shatabdinagar Parshad Interview: शहर के वार्ड 31 शताब्दीनगर की पहचान बड़े रिहायशी इलाके के साथ-साथ उन बुनियादी समस्याओं से भी है, जिनसे स्थानीय लोग लंबे समय से जूझ रहे हैं। कहीं सड़क पर गड्ढे हैं तो कहीं स्ट्रीट लाइट का संकट। नाले-नालियां चोक होने से बिना बारिश के भी जलभराव की स्थिति बन जाती है। कूड़े के ढेर और सड़क किनारे डंपिंग से लोगों को बदबू और प्रदूषण झेलना पड़ रहा है। सबसे गंभीर समस्या कुछ इलाकों में पेयजल की भी है, जहां पाइपलाइन में लीकेज के कारण सुबह के समय पहले गंदा पानी आने की शिकायत है।
इंटरमीडिएट तक पढ़े वार्ड के पार्षद कीर्ति घोपला उर्फ कुलदीप सिंह समाजवादी पार्टी से हैं। सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित इस वार्ड की आबादी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 17,344 है। पार्षद का कहना है कि वार्ड की समस्याएं केवल शिकायतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई बार संबंधित विभागों के अधिकारियों के सामने इन्हें उठाया जा चुका है।
नाले चोक, बिना बारिश जलभराव
पार्षद के मुताबिक वार्ड में जलनिकासी बड़ी चुनौती बनी हुई है। नाले और नालियां कई जगह चोक हैं। बारिश होने पर तो जलभराव होता ही है, कई स्थानों पर बिना बारिश के भी पानी जमा हो जाता है। उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था नियमित और प्रभावी हो तो काफी हद तक समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
सड़क किनारे कूड़ा, लोगों की बढ़ी परेशानी
वार्ड के कुछ हिस्सों में सड़क किनारे कूड़ा डाले जाने से स्थानीय लोग परेशान हैं। पार्षद का आरोप है कि निगम की ओर से डंपिंग किए जाने के कारण बदबू और प्रदूषण की स्थिति रहती है। इससे आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी बढ़ती है। उनका कहना है कि कूड़ा उठाने और उसके निस्तारण की व्यवस्था को वार्ड स्तर पर और बेहतर किए जाने की जरूरत है।
तीन किलोमीटर रास्ता अंधेरे में
स्ट्रीट लाइट की समस्या भी पार्षद के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। उनका कहना है कि करीब तीन किलोमीटर लंबे मुख्य मार्ग पर पर्याप्त रोशनी नहीं है। शाम ढलने के बाद यहां से गुजरने वाले लोगों को परेशानी होती है। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह समस्या अधिक गंभीर हो जाती है।
पानी की लाइन नाले के नीचे, लीकेज से गंदे पानी की शिकायत
पेयजल व्यवस्था को लेकर पार्षद ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पानी की टंकी से वार्ड के कुछ हिस्सों में सप्लाई होती है। इसकी पाइपलाइन कई जगह नाले के नीचे से डाली गई है। पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण सुबह पानी की सप्लाई शुरू होने पर कुछ स्थानों पर पहले गंदा पानी आने की शिकायत है।
कुलदीप के मुताबिक इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार शिकायत की गई है। उनका कहना है कि पाइपलाइन की लीकेज दूर होने के साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि पेयजल लाइन नाले के नीचे से डालने की व्यवस्था कितनी सुरक्षित है।
एमडीए से शिकायत, सड़क जरूरत की जगह जंगल में बना दी
सड़कों और नालियों को लेकर भी पार्षद एमडीए से शिकायत करने की बात कहते हैं। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत और धरने की चेतावनी के बाद खानापूर्ति के तौर पर काम कराया गया। उनका कहना है कि जहां सड़क की जरूरत थी, वहां काम कराने के बजाय जंगल की तरफ सड़क बना दी गई। पार्षद के अनुसार वह सड़क भी कुछ ही दिन में उखड़ गई।
सबसे बड़ी चुनौती- विभागों के बीच तालमेल
कुलदीप का कहना है कि पार्षद स्तर पर जनता की शिकायतें लगातार अधिकारियों तक पहुंचाई जाती हैं, लेकिन कई काम ऐसे हैं जिनमें नगर निगम के अलावा एमडीए और दूसरे विभाग भी जुड़े हैं। ऐसे में विभागों के बीच बेहतर तालमेल नहीं होने से समस्या का समाधान लंबा खिंच जाता है।
एक दिन पूरा निगम मिले तो पहले नाले और सड़क देखेंगे
पार्षद के मुताबिक यदि उन्हें एक दिन के लिए नगर निगम का पूरा प्रशासन चलाने का मौका मिले तो उनकी प्राथमिकता वार्डों की बुनियादी समस्याओं को दूर करना होगी। उनका कहना है कि नालों की सफाई, सड़क और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं किसी भी शहर की पहली जरूरत हैं। वह चाहते हैं कि शताब्दीनगर की जनता उन्हें ऐसे पार्षद के रूप में याद रखे, जिसने क्षेत्र की समस्याओं को लगातार उठाया और अधिकारियों से उनका समाधान कराने की कोशिश की।
सांसद और विधायक के कामकाज को लेकर भी पार्षद का रुख संतुलित है। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल चुनाव के समय तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जनता से नियमित संवाद, क्षेत्र में उपलब्धता और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए सक्रियता ही किसी जनप्रतिनिधि के काम का वास्तविक पैमाना होना चाहिए।


