Meerut News: फसलों की सुरक्षा के लिए सरकार देगी आधी लागत पर तार फेंसिंग

Meerut News: जंगली जानवरों और छुट्टा पशुओं से फसल बचाने के लिए बागवानी किसानों को तार फेंसिंग पर 50 फीसदी अनुदान मिलेगा, मेरठ में 50 किसानों को लाभ मिलेगा।

Sushil Kumar
Published on: 12 Jun 2026 10:09 PM IST
Government pays half-cost wire fencing for crop protection
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फसलों की सुरक्षा के लिए सरकार देगी आधी लागत पर तार फेंसिंग (Photo- Newstrack)

Meerut News: मेरठ, 12 जून। रात-दिन खेतों की रखवाली करने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है। जंगली जानवरों और छुट्टा पशुओं से फसलों को होने वाले भारी नुकसान को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बागवानी फसलों की तार फेंसिंग पर 50 प्रतिशत अनुदान देने की योजना शुरू की है। एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत लागू की गई इस पहल से किसानों को अपनी मेहनत की फसल सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

प्रदेश सरकार ने फल, सब्जी, मसाला, फूल और औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के साथ अब फसलों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया है। योजना के तहत खेतों के चारों ओर मजबूत तारबंदी कराई जाएगी, जिससे नीलगाय, आवारा पशु और अन्य जंगली जानवरों से फसलों को बचाया जा सके।

उद्यान विभाग के अनुसार तार फेंसिंग की अनुमानित लागत 300 रुपये प्रति रनिंग मीटर तय की गई है। इसमें किसानों को 150 रुपये प्रति मीटर की दर से अनुदान मिलेगा। एक किसान अधिकतम 5,000 मीटर तक की फेंसिंग पर योजना का लाभ ले सकेगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेशभर में 5 लाख मीटर फेंसिंग कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

फेंसिंग के लिए लोहे के मजबूत पोल लगाए जाएंगे और उनके बीच कंटीले तार लगाए जाएंगे। इससे खेतों की सुरक्षा पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकेगी। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को उद्यानिकी विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, खसरा-खतौनी और बैंक पासबुक सहित आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।

जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष जिले में 15 किसानों को योजना का लाभ मिला था। इस बार मेरठ में कम से कम 50 किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में 400 रनिंग मीटर फेंसिंग पर अनुदान दिया जाएगा, जबकि अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र तक ही सहायता मिलेगी।

किसानों का कहना है कि यदि योजना का लाभ समय पर मिला तो फसलों की सुरक्षा के साथ उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी और रात-रात भर खेतों की रखवाली की मजबूरी से काफी हद तक राहत मिलेगी।

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