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Muzaffarnagar News: टोल पर चंद्रशेखर आजाद का पुलिस से तीखा विवाद, गाड़ियां रोके जाने पर हंगामा
Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर के रोहाना टोल प्लाजा पर नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के काफिले की कुछ गाड़ियों को पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद सांसद और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। घटना का वीडियो चर्चा में है।
Muzaffarnagar News(Photo-Social Media)
Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद की नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित रोहाना टोल प्लाजा पर शुक्रवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया। जब नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद अपने काफिले के साथ सहारनपुर से मेरठ की ओर कूच कर रहे थे। इस दौरान चंद्रशेखर आजाद की गाड़ी तो टोल से निकल गई लेकिन उनके काफिले की कुछ गाड़ियों को पुलिसकर्मियों ने रोक दिया था। जिसके बाद चंद्रशेखर आजाद अपनी गाड़ी से उतरकर टोल पर पुलिसकर्मियों के पास गए जहां पुलिसकर्मियों से उनकी तीखी नोकझोंक भी हुई।
इस दौरान एक इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह चंद्रशेखर आजाद के सामने हाथ जोड़े खड़े नजर आए और चंद्रशेखर आजाद उसे ज्ञान का पाठ पढ़ाते दिखाई पड़े। इस दौरान इंस्पेक्टर ये कहता हुआ भी सुनाई पड़ा कि मैं इंस्पेक्टर हूं और इंस्पेक्टर ही रहूंगा गली नहीं दी थी किसी हाथ जोड़ रहा हूं। आपको बता दे की इस हंगामे के बाद चंद्रशेखर आजाद का काफिला मेरठ की ओर बढ़ गया बताया जा रहा है कि मेरठ पहुँचकर चंद्रशेखर आजाद एसएसपी मेरठ द्वारा जो बदसलूकी प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ की गई थी इस क्रम में वह उनसे मुलाकात करेंगे। चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि वह मेरठ एसएसपी से भी मुलाकात कर उनसे पूछेंगे कि उन्होंने ऐसा क्यों किया है इसके पीछे किसका हाथ है साथ ही चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि वह पीड़ित परिवार से भी मुलाकात करेंगे लेकिन यह देखना होगा कि क्या पुलिस उन्हें मेरठ तक पहुंचने देती है या नहीं। चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि मैं स्पष्ट कहता हूं कि कोई निर्दोष जेल न जाए और दोषी कोई बचे नही।
चंद्रशेखर आजाद की माने तो पूरे देश को पता है। मेरठ में क्या हुआ। और मैं भी चोरी से नहीं जा रहा हूं। सबको बता कर जा रहा हूं। क्योंकि जो हुआ है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक देश में वह अच्छा नहीं, जब इतने बड़े पद पर बैठे अधिकारी इस तरह का व्यवहार करेंगे। तो लोगों के मन में भय चिंता होना लाजमी है। मेरी और मेरे जैसे न्याय प्रसंग हर व्यक्ति की जिम्मेदारी बैठती है। कि वह उसके खिलाफ आवाज उठाएं। और सरकार से कार्रवाई की मांग करें उन अधिकारियों से भी मैं मिलूंगा पूछूंगा। जिन्होंने यह कृत्य किया। उनसे भी पूछूंगा।
अब यह तो पुलिस से पूछो। मेरे से क्यों पूछते हो। आप मेरा पुलिस का कोई वह थोड़ी है। कि मैं उनके कर्मचारी हूं या। अधिकारी हूं। यह तो पुलिस बता सकती है। हां फिर क्यों रोकना चाहती है। इसका जवाब दो पुलिस को देना चाहिए। ऐसा क्या है जिसको पुलिस रोक कर छुपाना चाहती है। देखिए उनका व्यवहार जो है। वह गरिमाएं नहीं है। और अगर कोई यह कहता है। कि हालात ऐसे थे। तो वहां किसी पर भी कोई हथियार नहीं था। डंडे ने बाजी नहीं हो रही थी। नारेबाजी से अगर कोई अधिकारी डर जाए। तो यह क्या भरोसा कि वह कल गोली नहीं चला सकता। इस तरह के कमजोर व्यवहार का अधिकारी मुझे लगता है। व्यवस्था में अच्छा नहीं उनके ऊपर कारवाई भी होनी चाहिए। और लोगों को सबक मिले इस तरह का व्यवहार नहीं करना।
नहीं आत्महत्या विकल्प नहीं लड़ना चाहिए। संघर्ष करना चाहिए। कोर्ट खुले हुए हैं। इसे बड़े अधिकारी हैं। लेकिन आत्महत्या अच्छा कदम नहीं मैं आत्महत्या का पक्षधर्मी नहीं मैं आत्महत्या का विरोधी हूं। एक बार जीवन मिला है। आपके संघर्ष करना चाहिए। आपके खिलाफ अन्याय हो तो लड़ना चाहिए। आप ही मर जाओगे तो कौन लड़ेगा। जितने भी साथी जिनके साथ अन्याय हुआ। मुझे उनकी पीड़ा है आज उन्हें जेल भेजा गया है क्योंकि मैं उनकी पीड़ा महसूस किया। अधिकारियों की गलती रही है। अगर अधिकारी समय पर सुन लेते। तो यह स्थिति नहीं बनती। और ऐसा नहीं कि पहले सड़कों पर आंदोलन नहीं हुआ, ऐसा कुछ नहीं है।
बिल्कुल मिलूंगा। अधिकारियों से भी मिलेगा। मैं एक संवैधानिक पद पर जिम्मेदारी से उनके परिवार से मिलेगा पीड़ा सुनूंगा उनके बड़े अधिकारियों से बात करूंगा। और अगर नहीं रास्ता निकाला तो उसके बाद आगे रैली के बाद जो भी संघर्ष होगा उसको करेंगे। क्यों रोका जाएगा। सवाल यह है। ना हम कोई अपराध करने जा रहे हैं। मैं आपके सामने बात कह रहा हूं। कोई नहीं कह पाएगा। मैं यह चाहता हूं। कोई निर्दोष जेल ना जाए। और कोई दोषी बचे ना। जो निर्दोष है। पुलिस फिर इन्वेस्टिगेशन करें अगर पुलिस की इन्वेस्टीगेशन पर परिवार को भरोसा नहीं हो पा रहा है। या पुलिस इस तरह का व्यवहार तो कैसे मान जाए की इन्वेस्टीगेशन फिर हो रही है। क्योंकि कर्मचारी अधिकारी इस तरह का व्यवहार कर रहा है। अपने भाषा देखी सड़क किसी के बाप की नहीं है, गंदगी कर दी सालो ने इस भाषा से मुझे चिंता हुई की जिले के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति भी जो इस तरह का अभद्र भाषा का व्यवहार कर रहा है। यह बड़ी चिंता का सवाल है बाकी आप लोग तो है ही देखते हैं। हम भी चल रहे है। बड़ी चिंता का सवाल है। यही चीज भय पैदा कर रही है। ऐसा क्यों किया गया। और किसके इशारे पर किया गया। ऐसा हम जाकर उनसे पूछेंगे। मैं एसपी से मिलूंगा और डीएम से भी मिलूंगा और पूछूंगा ऐसा उन्होंने क्यों किया।


