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Muzaffarnagar News: रेसलर बजरंग पुनिया ने बृजभूषण शरण सिंह को लेकर दिया बड़ा बयान, बोले - सरकार को अपनी वोट प्यारी हैं
Muzaffarnagar News: सरकार पर सवाल उठाते हुए बजरंग पूनिया ने कहा कि सरकार ने पहले ही उसको सपोर्ट करके हटवा दिया था , वह केस चलने ही नहीं दिया गया।
रेसलर बजरंग पुनिया (photo: social media )
Muzaffarnagar News: दिल्ली कोर्ट ने भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण को राहत देते हुए पुलिस द्वारा दायर की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। जिसके चलते अब बृजभूषण शरण पर लगी पोस्को की धारा हट जाएगी। जिसको लेकर आज एक निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेने मुजफ्फरनगर पहुंचे पहलवान बजरंग पूनिया ने मीडिया से बात करते हुए बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने कहा है कि पोस्को ( POSCO) अगर लगा था तो अब तक वह गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ। सरकार पर सवाल उठाते हुए बजरंग पूनिया ने कहा कि सरकार ने पहले ही उसको सपोर्ट करके हटवा दिया था , वह केस चलने ही नहीं दिया गया। बजरंग पुनिया का कहना है कि दबाव उन 6 लड़कियों पर भी है जो केस अभी चल रहा है और दबाव पोस्को वाली लड़की पर भी दिया गया था ,तभी वह पीछे हट गई । सरकार उसको सपोर्ट कर रही है इसलिए हमेशा बच्चों को डरा कर धमका कर पीछे हटाने का काम किया जा रहा है। बजरंग पुनिया का कहना है कि उस बेटी ने 164 के बयान दिए थे, बाद में बोल रहे हैं कि वह बयान पलटा नहीं जाता।
रेसलर बजरंग पूनिया ने कहा कि जो बच्चे एमबीबीएस करने के लिए जाते हैं, उनके लिए एक ऑफिस बनाया गया है। उन्होंने कहा, "भाइयों ने यह ऑफिस बनाया है, मैं उन्हें बधाई देता हूं। मुजफ्फरनगर के जो बच्चे और युवा डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हैं, वे इस ऑफिस से संपर्क कर अपना सपना पूरा कर सकते हैं।"
पीड़ित नाबालिग लड़की पर दबाव डालकर बयान बदलवाए गए
सरकार पर आरोप है कि पोक्सो मामले में आरोपी को संरक्षण दिया जा रहा है और पीड़ित नाबालिग लड़की पर दबाव डालकर बयान बदलवाए गए हैं। अगर पोक्सो एक्ट लागू था, तो आरोपी की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई? सरकार के समर्थन के कारण केस आगे नहीं बढ़ सका। आरोप है कि सरकार वोट बैंक की राजनीति के लिए बच्चों के हितों की अनदेखी कर रही है और बच्चों को डरा-धमकाकर पीछे हटने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
सरकार पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वह पोक्सो मामले में आरोपी को बचाने के लिए दबाव बना रही है, जबकि बच्चों के हितों की अनदेखी की जा रही है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब एक बार पीड़िता ने अपने बयान दर्ज करा दिए हैं, तो फिर भी दबाव में आकर उसे परेशान किया जा रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि गुंडागर्दी के आगे कानून कमजोर पड़ रहा है और सरकार की प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना है।


