NBRI के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: ‘गुड बैक्टीरिया’ से फसल बर्बाद करने वाले फंगस पर लगेगी लगाम

NBRI लखनऊ के वैज्ञानिकों ने Rhizoctonia solani फंगस को नियंत्रित करने के लिए लाभकारी बैक्टीरिया और दो बायो-केमिकल पदार्थों का संयोजन खोजा है।

Newstrack Network
Published on: 19 Aug 2026 11:21 PM IST
NBRI के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: ‘गुड बैक्टीरिया’ से फसल बर्बाद करने वाले फंगस पर लगेगी लगाम
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NBRI Lucknow: रासायनिक फफूंदरोधी (एंटीफंगल) दवाओं के बेअसर होने से फसलों पर मंडरा रहे संकट के बीच राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI), लखनऊ के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी जैविक समाधान खोज निकाला है। वैज्ञानिकों ने एक लाभकारी जीवाणु (गुड बैक्टीरिया) और दो बायो-केमिकल पदार्थों के अनूठे संयोजन से फसलों को बर्बाद करने वाले जानलेवा फंगस 'राइजोक्टोनिया सोलानी' (Rhizoctonia solani) को नियंत्रित करने में बड़ी सफलता हासिल की है।

प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका 'प्रोसेस सेफ्टी एंड एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन' में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, 'राइजोक्टोनिया सोलानी' फंगस धान, गेहूं, मक्का, आलू, टमाटर, सोयाबीन और मूंगफली जैसी प्रमुख फसलों में शीथ ब्लाइट और सड़ांध जैसी घातक बीमारियां फैलाता है, जिससे पैदावार में भारी गिरावट आती है। लंबे समय से रासायनिक दवाओं के अत्यधिक इस्तेमाल के चलते इस फंगस ने कीटनाशकों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली थी।

ऐसे काम करता है यह अनूठा जैविक फॉर्मूलेशन

शोध दल ने लाभकारी जीवाणु बैसिलस एमाइलोलिक्वीफेसिएंस (NBRI-SN13) का परीक्षण दो विशेष जैव-रासायनिक यौगिकों—5-एजासिटिडाइन (AZA) और सोडियम ब्यूटीरेट (SB) के साथ किया।

जीन स्तर पर वार: प्रयोगों में पाया गया कि जब 'एसएन-13' बैक्टीरिया और 'एजेडए' को एक साथ मिलाया गया, तो उसने फंगस के आंतरिक जीन ढांचे (जीन एक्सप्रेशन) में बदलाव कर दिया।

अंकुरण और कोशिकाएं नष्ट: इस जैविक संयोजन ने न केवल फंगस की वृद्धि और फैलाव को पूरी तरह रोक दिया, बल्कि उसके स्पोर्स (बीजाणुओं) के अंकुरित होने की क्षमता को भी खत्म कर दिया। इसके अलावा फंगल कोशिकाओं की बाहरी झिल्ली को गंभीर क्षति पहुंचाकर फंगस को बेअसर कर दिया।

धान पर दो साल तक चले परीक्षण में शत-प्रतिशत परिणाम

शोधकर्ताओं द्वारा धान के पौधों पर लगातार दो वर्षों तक ग्रीनहाउस और लैब परीक्षण किए गए। परीक्षण के दौरान एसएन-13 और एजेडए के संयुक्त इस्तेमाल से धान के पौधों में संक्रमण का स्तर नगण्य पाया गया और पौधों की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

यह महत्वपूर्ण शोध शुचि श्रीवास्तव के नेतृत्व में अनन्या द्विवेदी, अक्षिता माहेश्वरी, मेहर एच. आसिफ, गरिमा सक्सेना, अनामिका अस्थाना और पल्लवी की वैज्ञानिक टीम द्वारा पूरा किया गया है।

एनबीआरआई के निदेशक डॉ. जबीर अहमद ने इस खोज को कृषि क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि रासायनिक एंटीफंगल दवाओं के अप्रभावी होने के इस दौर में संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों को पर्यावरण-अनुकूल, सस्ता और बेहद सुरक्षित जैविक विकल्प प्रदान किया है। इस तकनीक के खेतों तक पहुंचने से न केवल जहरीले रसायनों पर निर्भरता घटेगी, बल्कि मिट्टी की सेहत सुधरने के साथ किसानों का फसल नुकसान भी रुकेगा।

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