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नोएडा GBU छात्र को 5 लाख का नोटिस देने वाला अधिकारी निलंबित, सुप्रीम कोर्ट में तुषार मेहता ने दी जानकारी
GBU छात्र अक्षत त्रिपाठी को CJP प्रदर्शन में शामिल होने पर 5 लाख रुपये के बॉन्ड का नोटिस देने वाले अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में SG तुषार मेहता ने जानकारी दी।
नई दिल्ली: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के छात्र को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में शामिल होने पर पांच लाख रुपये के बॉन्ड का नोटिस जारी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि छात्र को नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। मामले में विभागीय जांच भी जारी है।
यह मामला जीबीयू के बीए-एलएलबी छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 4 सितंबर को उन्हें नोटिस जारी कर छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पांच लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की दो जमानतें देने को कहा था। नोटिस में छात्र पर जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP के NEET पेपर लीक विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने और छात्रों को प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने से जुड़े आरोप लगाए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी कड़ी नाराजगी
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी करने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई थी। छात्र की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.वी. दिनेश ने अदालत से अधिकारियों को कड़ा संदेश देने का आग्रह किया।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को निलंबित किया जा चुका है। इसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासन ने मामले में संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस रिपोर्ट के आधार पर जारी हुआ था नोटिस
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, नोटिस जारी करने के लिए पुलिस की ओर से रिपोर्ट तैयार की गई थी। रिपोर्ट में छात्र पर कथित तौर पर सरकार विरोधी सूचनाएं फैलाने और छात्रों को CJP के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित करने के आरोप लगाए गए थे।
बाद में पुलिस जांच में नोटिस का आधार गलत पाए जाने के बाद इसे वापस ले लिया गया। संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी विभागीय जांच शुरू की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठा विवाद
इस मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को CJP के 20 से 25 जुलाई के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया था। इसके बाद जीबीयू छात्र को नया नोटिस जारी किए जाने पर अदालत में सवाल उठे।
छात्र की याचिका में नोटिस को चुनौती देते हुए कहा गया था कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के कारण इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और छात्रों के अधिकारों के बीच संतुलन पर भी सवाल उठाए।
फिलहाल, नोटिस वापस लिया जा चुका है और नोटिस जारी करने वाले अधिकारी के निलंबन के साथ संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


