'संघर्ष के नाम पर लग्जरी...', अखिलेश के पीडीए रथ पर ओपी राजभर का तंज, बोले- 2027 का सपना छोड़िए

OP Rajbhar Slams Akhilesh: ओपी राजभर ने अखिलेश यादव की पीडीए रथ यात्रा पर तंज कसते हुए रथ को लेकर सवाल उठाए। राजभर ने दलितों और पिछड़ों से जुड़ने को लेकर भी अखिलेश पर निशाना साधा।

Aditya Kumar Verma
Published on: 25 Sept 2026 3:21 PM IST
OP Rajbhar Takes Dig at Akhilesh Yadav’s PDA Rath Yatra
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Image Source- Social Media

OP Rajbhar Slams Akhilesh: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पीडीए रथ यात्रा (PDA Rath Yatra) को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओपी राजभर ने तंज कसा है। राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव के रथ और उनकी यात्रा पर सवाल उठाए हैं। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अखिलेश यादव ने 24 सितंबर को रायबरेली से पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत की है।

'आपका रथ तो एकदम डाइव स्टार है'

ओपी राजभर (ओपी राजभर) ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अखिलेश यादव के रथ को लेकर निशाना साधते हुए लिखा, “महाराज, आपका रथ तो एकदम डाइव स्टार है। ये बताइए कल रथ में बैठकर कितने दलितों और कितने पिछड़ों से आपने हाथ मिलाया?”

राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव दलितों और पिछड़ों से हाथ मिलाने से डरते हैं। उन्होंने अखिलेश यादव की पीडीए यात्रा के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे रथ को लेकर भी सवाल खड़े किए और इसे आम लोगों से जुड़ने की राजनीति से अलग बताया।

रथ को बताया हॉलीवुड जैसी वैनिटी वैन

सुभासपा अध्यक्ष ने अपने पोस्ट में कहा कि अखिलेश यादव रथ के नाम पर हॉलीवुड जैसी वैनिटी वैन या पहियों पर बने फाइव स्टार सुइट में घूम सकते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की दलित, अति पिछड़ी और गरीब जनता सत्ता में उन्हें जगह नहीं देगी।

राजभर ने पीडीए रथ के जरिए किए जा रहे प्रचार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने अखिलेश यादव को लग्जरी रथ में सवार होकर हाइड्रोलिक ट्रॉली के जरिए बाहर निकलकर लोगों का अभिवादन करते देखा।

'संघर्ष के नाम पर लग्जरी'

ओपी राजभर ने अखिलेश यादव की इस यात्रा को लेकर तंज कसते हुए इसे “संघर्ष के नाम पर लग्जरी” बताया। उनका कहना है कि जिस पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) की बात अखिलेश यादव कर रहे हैं, उसी समाज के लोगों के बीच पहुंचने और उनसे सीधे जुड़ने को लेकर उनके रथ पर सवाल उठ रहे हैं।

राजभर ने इसी सिलसिले में अखिलेश यादव के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को 2027 का सपना देखने के बजाय 2032 तक संघर्ष करना पड़ेगा और उसके बाद भी कुछ हासिल नहीं होगा।

पहले भी कीमत और रंग पर उठाए सवाल

ओपी राजभर इससे पहले भी अखिलेश यादव की कथित लग्जरी जीवनशैली और पीडीए रथ को लेकर निशाना साध चुके हैं। हाल में उन्होंने अखिलेश यादव के रथ की कीमत और उसके रंग को लेकर भी सवाल उठाए थे।

इस बार राजभर ने सीधे रथ में बैठकर दलितों और पिछड़ों से जुड़ने के दावे पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव की पीडीए यात्रा को लेकर राजनीतिक हमला बोला है।

रायबरेली से अखिलेश ने शुरू की PDA यात्रा

वहीं, अखिलेश यादव ने 24 सितंबर को रायबरेली से पीडीए रथ यात्रा (PDA Rath Yatra) की शुरुआत की है। यात्रा की शुरुआत के दौरान उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि उनकी पार्टी सकारात्मक राजनीति कर रही है।

अखिलेश यादव ने पीडीए का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक बताया और सामाजिक न्याय तथा आरक्षण से जुड़े मुद्दे उठाए। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग (Election Commission) और भाजपा (BJP) पर भी जमकर निशाना साधा।

सपा विधायक के घर भी पहुंचे अखिलेश

पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत के दौरान अखिलेश यादव सपा विधायक राहुल लोधी के घर भी पहुंचे। यहां उन्होंने चाय पी और पार्टी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।

एक तरफ अखिलेश यादव अपनी पीडीए यात्रा के जरिए पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को सामने रख रहे हैं, तो दूसरी तरफ ओपी राजभर उनके रथ और यात्रा के तरीके को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में पीडीए रथ यात्रा को लेकर अखिलेश यादव और ओपी राजभर के बीच जुबानी हमला देखने को मिल रहा है।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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