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पीलीभीत वोटर लिस्ट धांधली में बड़ा एक्शन! दो SDM हटाए गए, FIR दर्ज; SIR में गड़बड़ी के बाद दिखी सख्ती
पीलीभीत वोटर लिस्ट गड़बड़ी मामले में दो SDM मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी समेत तीन लोगों पर FIR दर्ज। कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा समाप्त, यूपी के सभी जिलों में मतदाता सूची की जांच के आदेश।
Pilibhit Voter List Controversy: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुचिता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पीलीभीत में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट में कथित अनियमितता सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। मामले में दो एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को उनके मौजूदा तैनाती स्थलों से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को दो दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। जांच का मुख्य उद्देश्य मतदाता पहचान संख्या (EPIC) और मतदाताओं के विवरण में संभावित गड़बड़ियों का पता लगाना है।
क्या है पीलीभीत वोटर लिस्ट गड़बड़ी का पूरा मामला?
यह मामला पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 की मतदाता सूची से जुड़ा है। शिकायत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के निर्देश पर जिला निर्वाचन अधिकारी से जांच कराई गई। शुरुआती जांच में पाया गया कि कुछ मतदाताओं के EPIC नंबर ऑनलाइन सर्च करने पर किसी दूसरे मतदाता का विवरण सामने आ रहा था। इसके बाद निर्वाचन विभाग ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
ताजा जानकारी के मुताबिक, सहायक निर्वाचन अधिकारी की शिकायत पर नगर कोतवाली में दोनों एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी तथा कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। दोनों एसडीएम के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है। हालांकि, एफआईआर दर्ज होने का अर्थ आरोप साबित होना नहीं है।
कांग्रेस ने लगाए 13 हजार से अधिक नाम बदलने के आरोप
पीलीभीत वोटर लिस्ट का मामला राजनीतिक विवाद भी बन गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सदर विधानसभा क्षेत्र में अंतिम ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके EPIC नंबर और मतदाता सूची के क्रमांक कथित तौर पर वही रहे। पार्टी ने मतदाता सूची से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने और क्षेत्र में नहीं रहने वाले लोगों के नाम जोड़ने का भी आरोप लगाया है।
समाजवादी पार्टी ने भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया था। हालांकि, विपक्ष की ओर से लगाए गए सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। आधिकारिक जांच में फिलहाल EPIC नंबर खोजने पर दूसरे मतदाता का विवरण प्रदर्शित होने की गड़बड़ी की पुष्टि सामने आई है।
यूपी के सभी जिलों में मतदाता सूची की जांच के आदेश
पीलीभीत में मामला सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने-अपने जिलों के सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में इसी तरह की संभावित गड़बड़ियों की जांच करने और दो दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। पीलीभीत में भी सभी विधानसभा क्षेत्रों की सूचियों की गहन पड़ताल होगी।


