Pilibhit News: ड्राइवर-बिचौलियों ने किसान से 1.30 लाख रुपये की अवैध वसूली, जांच व कार्रवाई की मांगी

Pilibhit News: शिवसेना ने जिलाधिकारी को ज्ञापन में कहा कि तहसील के ड्राइवर व बिचौलिये किसानों से कुर्रा-बंटवारे के लिए ₹1.30 लाख अवैध वसूली कर रहे हैं।

Pranjal Gupata
Published on: 22 Sept 2025 4:21 PM IST
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Pilibhit News: पीलीभीत: बीसलपुर तहसील में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के गंभीर आरोप प्रकाशित हुए हैं। शिवसेना जिला इकाई ने जिलाधिकारी को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर कहा कि तहसील के कुछ कर्मचारी, उनके ड्राइवर और स्थानीय बिचौलिये मिलकर किसानों से कुर्रा-बंटवारे जैसे मामलों में मोटी रकम वसूल रहे हैं। ज्ञापन में राजाराम पुत्र लीलाधर निवासी नगला चांस दियोरिया कलां का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि उनसे कुर्रा-बंटवारे के नाम पर ₹1,30,000 अवैध रूप से लिए गए। राजाराम ने बताया कि जब उन्होंने पैसे वापस माँगे तो धमकियाँ दी गईं और जान से मारने तक की बात की गई, जिससे वह भयग्रस्त हैं।

शिवसेना ने इस कृत्य को प्रशासन की गरिमा पर आघात माना और कहा कि यह एक संगठित गिरोह द्वारा किए जा रहे घिनौने कृत्यों का संकेत है, जो सीधे-सादे किसानों को निशाना बना रहा है। पार्टी ने कहा कि ऐसे मामलों से ग्रामीण जनता का सरकारी व्यवस्थाओं पर विश्वास कमजोर होता जा रहा है।

ज्ञापन में शिवसेना ने तीन मुख्य मांगें रखीं: तत्काल उच्च-स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए, संदिग्धों को निलंबित कर त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए और पीड़ित किसान को उनकी ठगी गई राशि जल्द लौटाई जाए। शिवसेना ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय पर और निष्पक्ष कदम नहीं उठाया तो वे शांतिपूर्ण लेकिन व्यापक आंदोलन के द्वारा किसानों का न्याय दिलाएंगे।

ज्ञापन सौंपने के समय जिला अध्यक्ष शैली शर्मा, उपाध्यक्ष प्यारे लाल प्रजापति, कानूनी सलाहकार एडवोकेट आरके शर्मा, जिला मीडिया प्रभारी इंद्रजीत सिंह राजपूत, जिला महामंत्री ऋषभ सिंह व सैकड़ों शिवसैनिक मौजूद रहे। स्थानीय लोगों ने भी घटना के खिलाफ रोष जताया और तुरंत कार्रवाई की मांग की। जिलाधिकारी की ओर से प्राप्त आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।

प्रशासन ने मामले की तफ्तीश के संबंध में किसी भी प्रकार की टिप्पणी से परहेज किया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जांच शुरू करने और आवश्यक पहल करने की बात सुनी जा रही है। यह मामला बीसलपुर तहसील के कामकाज और जवाबदेही पर नए सवाल खड़े करता है और ग्रामीणों की सुरक्षा व अधिकार सुनिश्चित करने की प्रशासनिक जिम्मेदारी पर ध्यान आकर्षित करता है। किसानों को जल्द न्याय दिलाने की प्रतिज्ञा।

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