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Pilibhit News: सिस्टम से हारा किसान, अधिकारियों को दान में देने की पेशकश की अपनी जमीन
Pilibhit News: प्रशासनिक समस्याओं और लंबित मामलों से परेशान एक किसान ने अपनी जमीन अधिकारियों को दान में देने की पेशकश कर दी। मामले ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बनकर व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
Pilibhit News(Photo-Social Media)
Pilibhit News: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में प्रशासनिक उदासीनता और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लंबे समय से राजस्व विभाग के चक्कर काट रहे एक किसान ने अपनी पैतृक जमीन का हिस्सा किसी जरूरतमंद को देने के बजाय सीधे एसडीएम सदर और संबंधित लेखपाल के नाम दान करने की घोषणा कर दी है। किसान का यह पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और प्रशासनिक महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला पीलीभीत के ग्राम उमरसड़ मुस्तकिल निवासी संजीव कुमार पुत्र रामलाल से जुड़ा है। किसान का आरोप है कि वह गाटा संख्या 151 (रकबा 0.202 हेक्टेयर) में अंश संशोधन कराने के लिए पिछले नौ माह से अधिक समय से अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक उसका कार्य नहीं हो सका है।
संजीव कुमार का कहना है कि उसने इस संबंध में जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल तक गुहार लगाई। इतना ही नहीं, स्थानीय मंत्री द्वारा भी एसडीएम सदर को कई बार फोन कर मामले में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए, लेकिन इसके बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। किसान ने जिलाधिकारी को संबोधित अपने पत्र में राजस्व विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि संबंधित लेखपाल द्वारा की गई कथित त्रुटियों और खतौनी में नाम दर्ज करने संबंधी शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। किसान का आरोप है कि 20 हजार रुपये की कथित रिश्वत न दे पाने के कारण उसका काम लंबित रखा गया।
लगातार उपेक्षा और मानसिक तनाव से परेशान किसान ने अपने पत्र में लिखा है कि गाटा संख्या 151 में उसका लगभग आधा बीघा हिस्सा बनता है, जिसे वह अपनी स्वेच्छा से एसडीएम सदर श्रद्धा सिंह और लेखपाल अमित कुमार सक्सेना को दान में देने के लिए तैयार है। उसने प्रशासन से मांग की है कि उसके नाम के स्थान पर दोनों अधिकारियों का नाम सरकारी अभिलेखों में दर्ज कर दिया जाए। किसान ने यह भी कहा है कि वह इस प्रक्रिया के लिए आवश्यक शपथपत्र और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने को तैयार है। साथ ही उसने अपने पूर्व में दिए गए सभी प्रार्थना पत्र वापस लेने और मामले में आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता न होने की बात भी कही है।
पत्र में मुख्यमंत्री शिकायत निवारण प्रणाली की संदर्भ संख्या का उल्लेख करते हुए किसान ने दावा किया है कि उसने अपनी प्रतिक्रिया में भी यही बात दर्ज कराई है और वह अपने निर्णय पर कायम है। अब यह मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है। देखना होगा कि जिला प्रशासन इस अनोखे विरोध और लगाए गए आरोपों को किस गंभीरता से लेता है तथा मामले में क्या कार्रवाई करता है।


