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नोबेल विजेता क्लाउस फॉन क्लिट्जिंग का ज्ञान-संग्रह आएगा प्रयागराज, IIIT को मिलेंगी किताबें
Prayagraj: नोबेल विजेता क्लाउस फॉन क्लिट्जिंग का निजी अकादमिक संग्रह प्रयागराज स्थित IIIT इलाहाबाद पहुंचेगा। इसमें किताबें, शोधपत्र और अध्ययन सामग्री शामिल हैं।
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Prayagraj: भौतिकी की जिस खोज ने विद्युत प्रतिरोध को मापने के तरीके को असाधारण सटीकता दी और जिसके नाम पर आज एक मूलभूत भौतिक स्थिरांक से जुड़ा मानक जाना जाता है, उस खोज के नोबेल विजेता वैज्ञानिक प्रो. क्लाउस फॉन क्लिट्जिंग का निजी अकादमिक संग्रह अब प्रयागराज पहुंचने की तैयारी में है। जर्मनी के प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी अपने वैज्ञानिक जीवन में संजोई पुस्तकों, संदर्भ ग्रंथों, शोधपत्रों और अध्ययन सामग्री का निजी संग्रह भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद को देने जा रहे हैं। संस्थान ने इस संग्रह को जर्मनी से भारत लाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रो. क्लिट्जिंग ने 1980 में quantized Hall effect की खोज की थी। अत्यंत कम तापमान और शक्तिशाली magnetic field में दो आयामी electron system का अध्ययन करते हुए उन्होंने पाया कि Hall resistance लगातार बदलने के बजाय निश्चित quantized values पर दिखाई देता है। यह खोज condensed matter physics और precision measurement के लिए इतनी महत्वपूर्ण साबित हुई कि केवल पांच वर्ष बाद 1985 में उन्हें अकेले Physics का Nobel Prize प्रदान किया गया। उनके नाम से जुड़ा von Klitzing constant आगे चलकर electrical resistance की अत्यंत सटीक metrology में महत्वपूर्ण बना।
अब इसी वैज्ञानिक के निजी अध्ययन संसार का एक हिस्सा प्रयागराज के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं तक पहुंचने जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संग्रह में प्रो. क्लिट्जिंग की स्वयं लिखी सामग्री के साथ quantum physics की महत्वपूर्ण reference books और उनके लंबे वैज्ञानिक जीवन से जुड़े research papers तथा दूसरी अध्ययन सामग्री शामिल है। किसी बड़े वैज्ञानिक का निजी संग्रह सामान्य library collection से इसलिए अलग होता है क्योंकि वह यह भी दिखा सकता है कि वैज्ञानिक ने अपने विषय को किन पुस्तकों, शोधपत्रों और विचारों के बीच विकसित किया। अगर संग्रह को व्यवस्थित तरीके से सूचीबद्ध और संरक्षित किया जाता है तो यह विद्यार्थियों के लिए केवल पढ़ने की सामग्री नहीं बल्कि आधुनिक physics के विकास का एक छोटा academic archive भी बन सकता है।
इस पहल की शुरुआत IIIT Allahabad के प्रो. अखिलेश तिवारी की जर्मनी यात्रा के दौरान हुई। वहां प्रो. क्लिट्जिंग के साथ उनकी व्यक्तिगत मुलाकात और वैज्ञानिक चर्चा हुई। बातचीत भारतीय विद्यार्थियों, उच्च शिक्षा और शोध तक पहुंची तो प्रो. क्लिट्जिंग ने अपना निजी पुस्तक एवं अध्ययन संग्रह संस्थान को देने की इच्छा जताई। इसके बाद IIIT ने इसे भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की।
प्रयागराज के लिए इस संग्रह का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि शहर में quantum science और information technology से जुड़ी उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ रहा है। Quantum computing, quantum communication, quantum sensing और quantum materials जैसे क्षेत्रों में दुनिया भर में तेजी से शोध हो रहा है। भारत ने भी National Quantum Mission के जरिए इस क्षेत्र में शोध, प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षित मानव संसाधन विकसित करने पर जोर बढ़ाया है। ऐसे समय में Nobel laureate से जुड़ा reference collection विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अतिरिक्त अकादमिक संसाधन बन सकता है।
हालांकि किसी निजी संग्रह के महत्व का वास्तविक आकलन उसके प्रयागराज पहुंचने और उसकी पूरी सूची सामने आने के बाद ही संभव होगा। कौन-कौन सी दुर्लभ पुस्तकें इसमें हैं, क्या शोधपत्रों पर प्रो. क्लिट्जिंग की निजी टिप्पणियां या annotations मौजूद हैं, क्या correspondence अथवा दूसरे archival documents भी इसका हिस्सा हैं और विद्यार्थियों को संग्रह तक किस तरह पहुंच मिलेगी—ये बातें संग्रह के व्यवस्थित होने के बाद अधिक स्पष्ट होंगी। यदि इसमें केवल प्रकाशित पुस्तकें और शोधपत्र नहीं बल्कि वैज्ञानिक की निजी टिप्पणियों वाली सामग्री भी हुई तो इसका शोध-मूल्य और बढ़ सकता है।
1980 की एक प्रयोगशाला खोज से 1985 के Nobel Prize तक पहुंचने वाले क्लाउस फॉन क्लिट्जिंग का वैज्ञानिक सफर quantum physics के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। अब उनके अध्ययन कक्ष में दशकों से संजोया गया ज्ञान-संग्रह हजारों किलोमीटर की यात्रा करके प्रयागराज पहुंचने जा रहा है। विद्यार्थियों के लिए इसकी सबसे बड़ी विशेषता शायद यही होगी कि वे quantum physics को केवल पाठ्यपुस्तक में पढ़ने के बजाय उस वैज्ञानिक की बौद्धिक विरासत के करीब से देख सकेंगे जिसकी एक खोज ने आधुनिक condensed-matter physics और precision electrical measurement पर स्थायी छाप छोड़ी।


