Inside Story: कौन हैं विजय मिश्रा, जिन्हें 46 साल बाद मिली उम्रकैद की सजा! 1980 का ये 'हत्या' का बड़ा मामला

Inside Story: इस फैसले को प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में एक बड़े और ऐतिहासिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

Priya Singh Bisen
Published on: 13 May 2026 5:55 PM IST (Updated on: 13 May 2026 5:55 PM IST)
Vijay Mishra life imprisonment
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Vijay Mishra life imprisonment

Inside Story: उत्तर प्रदेश के एक बेहद चर्चित 'कचहरी हत्याकांड' मामले में आखिरकार आज 13 मई 2026 को लगभग 46 साल बाद न्याय मिल गया। प्रयागराज की MP-MLA कोर्ट ने आज बुधवार को पूर्व विधायक विजय मिश्रा सहित चार दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई। अदालत ने बीते मंगलवार को सभी आरोपियों को दोषी ठहराया था, जिसके बाद आज सजा का औपचारिक ऐलान किया गया। इस फैसले को प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में एक बड़े और ऐतिहासिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

11 फरवरी 1980 को हुई थी सनसनीखेज वारदात

यह मामला 11 फरवरी 1980 का है, जब प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) की दीवानी कचहरी परिसर में दिनदहाड़े गोलीबारी हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, नवाबगंज थाना क्षेत्र के हथिगहां निवासी प्रकाश नारायण पांडेय एक मामले में जमानत कराने के लिए कचहरी आए थे। दोपहर के वक़्त वह परिसर में स्थित एक चाय की दुकान पर बैठे हुए थे, तभी अचानक हमलावर वहां पहुंच गए।

FIR के मुताबिक, हंडिया निवासी विजय मिश्रा, संतराम, बलराम और जीत नारायण हथियारों से लैस होकर पीछे के रास्ते से कचहरी परिसर में घुस गए और प्रकाश नारायण पांडेय पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। आरोपियों ने पहले धमकी दी और फिर सीने में गोली मार दी। अचानक हुई गोलीबारी से कचहरी परिसर में भयंकर रूप से अफरातफरी मच गई और कई लोग घायल भी हो गए।

अस्पताल में हुई थी मौत

घटना के तुरंत बाद गंभीर रूप से घायल प्रकाश नारायण पांडेय को स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस वारदात ने उस वक़्त पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। कचहरी परिसर जैसी सुरक्षित मानी जाने वाले स्थान पर खुलेआम हत्या ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

अदालत ने माना जघन्य अपराध

विशेष न्यायाधीश (MP-MLA कोर्ट) योगेश कुमार तृतीय की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि यह एक गंभीर और जघन्य अपराध था, जिसने समाज में भय का माहौल पैदा किया था। कोर्ट ने गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।

सरकार की तरफ से एक खास लोक अभियोजक वीके सिंह, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार वैश्य और सहायक अधिवक्ता संजीव कुमार यादव ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि यह हत्या पुरानी रंजिश के कारण गई थी।

केस फाइल गायब होने के भी लगे आरोप

इस मामले की सुनवाई दशकों तक चलती रही। बीच में केस की पत्रावली (फाइल) गायब होने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए थे, जिससे न्यायिक प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हुई। हालांकि, तमाम रुकावटों के बावजूद अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आखिरकार फैसला सुना दिया।

कौन हैं विजय मिश्रा ?

पूर्व विधायक विजय मिश्रा पहले से ही कई आपराधिक मामलों में जेल में बंद हैं। उन पर हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर अपराधों के तकरीबन 70 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। फिलहाल वह आगरा जेल में बंद हैं। अब इस ताजा फैसले के बाद उनकी कानूनी मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं।

लगभग 46 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आए इस बड़े फैसले से पीड़ित परिवार ने संतोष जताया है। वहीं, इस निर्णय को न्याय व्यवस्था की दृढ़ता और कानून के लंबे हाथ का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

Priya Singh Bisen

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