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UP News: सरकारी स्कूलों के मिड डे मील बनाने वाले रसोइयों के लिए खुशखबरी, सेवानिवृत्ति आयु पर होगा बड़ा फैसला
Mid Day Meal Scheme: सरकार और मध्याह्न भोजन प्राधिकरण स्तर पर चल रही चर्चाओं के बाद रसोइयों के लिए पहली बार सेवा नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
Mid Day Meal Scheme
Mid Day Meal Scheme: उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में मध्याह्न भोजन (MDM) तैयार करने वाले लाखों रसोइयों को जल्द बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार और मध्याह्न भोजन प्राधिकरण स्तर पर चल रही चर्चाओं के बाद रसोइयों के लिए पहली बार सेवा नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो उनकी सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष निर्धारित की जा सकती है। साथ ही छुट्टियों, नियुक्ति प्रक्रिया और अन्य सेवा सुविधाओं को भी नियमों के तहत शामिल किया जाएगा।
3.63 लाख रसोइये संभाल रहे हैं भोजन व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद वर्ष 2004 में प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने की योजना शुरू की गई थी। इसके बाद 2007 और 2008 में इसे उच्च प्राथमिक विद्यालयों तक विस्तारित कर दिया गया। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 1.41 लाख विद्यालयों में 1.52 करोड़ से अधिक बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए करीब 3.63 लाख रसोइये कार्यरत हैं, जो लंबे समय से बेहतर सेवा शर्तों की मांग कर रहे हैं।
अब तक नहीं थीं स्पष्ट सेवा शर्तें
रसोइयों को वर्तमान में 2,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, लेकिन उनके लिए कोई स्पष्ट सेवा नियमावली नहीं है। ग्राम समितियां उनका चयन करती हैं और कई मामलों में उन्हें हटाने का निर्णय भी स्थानीय स्तर पर ही लिया जाता है। स्थिति यह है कि कुछ रसोइये 70 से 75 वर्ष की उम्र तक भी कार्य कर रहे हैं, क्योंकि उनके लिए कोई निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु तय नहीं की गई है। इसके अलावा उन्हें केवल 10 माह का मानदेय मिलता है, जबकि अन्य संविदा कर्मियों जैसे शिक्षामित्र और अनुदेशक 11 माह का मानदेय प्राप्त करते हैं।
प्रदर्शन के बाद तेज हुई प्रक्रिया
हाल ही में रसोइयों द्वारा अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, शिक्षा विभाग और शासन स्तर के अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। इन बैठकों में रसोइयों की समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया। सूत्रों के अनुसार, अब सेवा नियमावली का मसौदा तैयार किया जा रहा है, जिसमें 62 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु का प्रस्ताव शामिल हो सकता है।
सेवा नियमावली से मिलेंगे कई नए लाभ
नई सेवा शर्तें लागू होने के बाद रसोइयों को कई सुविधाएं मिल सकती हैं। मातृत्व अवकाश, चाइल्ड केयर लीव और अन्य छुट्टियों का प्रावधान भी नियमावली में शामिल किया जा सकता है। इससे ग्राम समितियों की मनमानी पर भी रोक लगेगी और रसोइयों को अधिक सुरक्षा और स्थिरता मिलेगी। इसके अलावा, अन्य संविदा कर्मियों की तरह रसोइयों के मानदेय को 10 माह से बढ़ाकर 11 माह करने पर भी विचार किया जा रहा है।


