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Raebareli News: रायबरेली में आचार्य द्विवेदी जयंती पर सजी भव्य काव्य गोष्ठी
Raebareli News: रायबरेली में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की 162वीं जयंती पर राजघाट तट पर भव्य काव्य गोष्ठी हुई, जहां कवियों ने साहित्यिक रसधारा बहाई।
रायबरेली में आचार्य द्विवेदी जयंती पर सजी भव्य काव्य गोष्ठी (Photo- Newstrack)
Raebareli News: रायबरेली। हिन्दी साहित्य के युगप्रवर्तक और खड़ी बोली को परिष्कृत कर उसे जन-जन की भाषा बनाने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी (Acharya Mahavir Prasad Dwivedi) की 162वीं जयंती के पावन अवसर पर जनपद में साहित्य का अनूठा संगम देखने को मिला। सई नदी के किनारे राजघाट पुल के समीप, आचार्य जी की निर्माणाधीन प्रतिमा के समक्ष संध्या बेला में एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
श्रद्धांजलि और माल्यार्पण
कार्यक्रम का आयोजन आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति के तत्वावधान में किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ समिति के संयोजक श्री गौरव अवस्थी द्वारा आचार्य द्विवेदी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर गौरव अवस्थी ने आचार्य जी के जीवन संघर्षों और साहित्य के प्रति उनके अविस्मरणीय योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में आए कवियों और प्रबुद्धजनों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया।
काव्य रस से सराबोर हुई संध्या
काव्य गोष्ठी की शुरुआत जनपद के सुप्रसिद्ध गीतकार दुर्गाशंकर वर्मा 'दुर्गेश' की मधुर अवधी वाणी वन्दना से हुई। इसके पश्चात देर रात तक साहित्य की सरिता बहती रही:
वरिष्ठ गीतकार: आचार्य सूर्य प्रसाद शर्मा 'निशिहर' और शिवबहादुर सिंह 'दिलवर' ने अपनी रचनाओं से गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया।
अन्य प्रमुख कवि: मुकुल किशोर तिवारी, डॉ. किरन शुक्ला, डॉ. राम लखन शर्मा, शिवनाथ सिंह 'शिव', मयंक मिश्र और प्रदीप मौर्य ने अपनी सुमधुर कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रेरणादायक संबोधन
गोष्ठी की अध्यक्षता श्री कृष्ण कुमार पाण्डेय ने की तथा मंच संचालन शंकर प्रसाद मिश्र द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। इस दौरान राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित पूर्व स्काउट कमिश्नर लक्ष्मीकांत शुक्ल और सेवानिवृत्त अधिकारी परशुराम मिश्र ने आचार्य द्विवेदी के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे आचार्य जी ने 'सरस्वती' पत्रिका के माध्यम से हिन्दी साहित्य को एक नई दिशा दी।
"आचार्य द्विवेदी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्था थे जिन्होंने हिन्दी को उसका वास्तविक स्वरूप प्रदान किया।"
प्रमुख उपस्थिति एवं आभार
कार्यक्रम के अंत में समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार शुक्ल ने सभी आगंतुक कवियों और प्रबुद्धजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में विनय द्विवेदी, अमित सिंह, अमर द्विवेदी, श्रीमती क्षमता मिश्रा, प्रिया पाण्डेय, राजेश द्विवेदी सहित भारी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। रात्रि 9 बजे तक चली इस गोष्ठी ने राजघाट के तट को साहित्यिक चेतना से आलोकित कर दिया।


