TRENDING TAGS :
Raebareli News : रायबरेली में मनाई गई आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की 162वीं जयंती
Raebareli News : रायबरेली में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की 162वीं जयंती पर साहित्यकारों और नागरिकों ने दी श्रद्धांजलि।
Raebareli News
Raebareli News : आधुनिक हिंदी साहित्य के आधार स्तंभ और खड़ी बोली को परिष्कृत करने वाले महान शिल्पकार, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की 162वीं जयंती शनिवार को रायबरेली में अत्यंत गरिमा और उत्साह के साथ मनाई गई। उनके पैतृक गांव दौलतपुर से लेकर शहर के मुख्य स्थलों तक, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों ने इस 'हिंदी नवजागरण के अग्रदूत' को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रमुख आयोजनों की झलकियाँ
श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का सिलसिला उनके पैतृक गांव दौलतपुर से शुरू होकर शहर के राही ब्लॉक और श्री गुरु गोविंद सिंह पर्यावरण पार्क तक पहुँचा। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति न्यास द्वारा आयोजित मुख्य समारोह में वक्ताओं ने उनके साहित्यिक योगदान को याद किया।न्यास अध्यक्ष विनोद कुमार शुक्ला ने कहा कि आचार्य द्विवेदी ने न केवल भाषा को संस्कारित किया, बल्कि हिंदी साहित्य को एक नई दिशा और दृष्टि प्रदान की।
ब्लॉक प्रमुख धर्मेंद्र यादव ने उन्हें 'हिंदी अस्मिता का प्रेरणापुंज' बताते हुए कहा कि उनकी विरासत को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।वरिष्ठ पत्रकार गौरव अवस्थी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि राजघाट पर आचार्य जी की एक आदमकद प्रतिमा स्थापित की जा रही है, जिसका अनावरण शीघ्र ही होगा।
साहित्यिक चेतना का प्रसार
कार्यक्रम में 'यूथ एक्टिविटी फोरम' की अध्यक्ष क्षमता मिश्रा ने युवाओं को हिंदी साहित्य और भारतीय मूल्यों से जोड़ने पर जोर दिया। उपस्थित वक्ताओं का मानना था कि आचार्य द्विवेदी ने 'सरस्वती' पत्रिका के माध्यम से जिस पत्रकारिता और साहित्य की नींव रखी, वह आज भी प्रासंगिक है।
उपस्थिति एवं सम्मान
इस अवसर पर आनंद स्वरूप श्रीवास्तव, युगुल किशोर तिवारी, अशोक शर्मा, प्रदीप पांडेय और दिनेश शुक्ल सहित जनपद के सैकड़ों गणमान्य नागरिकों, पत्रकारों और साहित्यकारों ने प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। दौलतपुर में स्थानीय ग्रामीणों और विनय कुमार शुक्ल, केशव बाजपेई जैसे प्रबुद्ध जनों ने भी आचार्य जी को नमन किया।पूरा जनपद 'हिंदी नवजागरण' की चेतना से सराबोर दिखा। यह आयोजन न केवल एक महापुरुष का स्मरण था, बल्कि हिंदी भाषा के प्रति गौरव और संकल्प का प्रतीक भी बना।


