TRENDING TAGS :
Raebareli News: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: रायबरेली के शाश्वत नर्सिंग होम की सील तत्काल खोलने के निर्देश
Raebareli News: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रायबरेली के शाश्वत नर्सिंग होम को तत्काल डी-सील करने का आदेश दिया है। हालांकि, पंजीकरण होने तक अस्पताल का संचालन नहीं किया जा सकेगा।
Raebareli News
Raebareli News: शहर में सीएमओ कार्यालय के पास इंदिरा नगर विस्तार योजना, जेल रोड स्थित शाश्वत नर्सिंग होम को सील किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने परिसर को तत्काल डी-सील करने (सील खोलने) का निर्देश दिया है, लेकिन स्पष्ट किया है कि अस्पताल का संचालन Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act, 2010 के तहत विधिवत पंजीकरण होने तक नहीं किया जाएगा।
यह आदेश डॉ. अमित सिंह, सोल प्रोपराइटर मेसर्स शाश्वत नर्सिंग होम की ओर से दाखिल रिट-सी संख्या 9855/2026 पर सुनवाई के बाद 8 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने पारित किया।याचिका में 6 जुलाई 2026 को जारी सीजर मेमो, 7 जुलाई और 13 जुलाई के नोटिस को चुनौती देते हुए परिसर को डी-सील करने तथा अधिकारियों को आगे की कार्रवाई से रोकने की मांग की गई थी। मामले में परिसर प्लॉट नंबर 18 व 9, सीएमओ कार्यालय के पास, इंदिरा नगर विस्तार योजना, जेल रोड, रायबरेली में स्थित बताया गया है।सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से वर्ष 2004 के शासनादेश और सुप्रीम कोर्ट के डीके जोशी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दिए गए निर्देशों का हवाला दिया गया। इन निर्देशों का उद्देश्य अयोग्य और अपंजीकृत व्यक्तियों द्वारा चिकित्सा व्यवसाय किए जाने पर रोक लगाना है।
हालांकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मौजूदा मामले में याची के अयोग्य या अपंजीकृत चिकित्सक होने का आरोप नहीं है, बल्कि अस्पताल के बिना पंजीकरण संचालित होने की बात सामने आई है।कोर्ट ने निर्देश दिया कि परिसर को तत्काल डी-सील किया जाए, लेकिन याची को यह undertaking देनी होगी कि अस्पताल का संचालन तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक वह संबंधित कानून के तहत विधिवत पंजीकृत न हो जाए। आदेश की शर्त का उल्लंघन होने पर सक्षम प्राधिकारी को दोबारा परिसर सील करने समेत उचित कार्रवाई करने की स्वतंत्रता रहेगी।कोर्ट ने इन्हीं निर्देशों के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया। आदेश 8 अक्टूबर 2026 को पारित हुआ।


