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Raebareli News: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया एमसीएफ का दौरा
Raebareli News: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का एमसीएफ दौरा: चिंतन शिविर के माध्यम से कार्यक्षमता बढ़ाने का दिया मंत्र, टीम वर्क और नवाचार पर जोर
Raebareli News राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया एमसीएफ का दौरा (Social Media).jpg
Raebareli News: उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज रायबरेली स्थित आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना (MCF) का भ्रमण किया। इस अवसर पर उन्होंने राजभवन के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आयोजित 'चिंतन शिविर एवं प्रबंधन दक्षता संवर्धन कार्यक्रम' का नेतृत्व किया। यह आयोजन राजभवन की कार्यप्रणाली में आधुनिकता और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से किया गया था।
रणनीतिक कार्यशैली और टीम वर्क पर जोर
चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए राज्यपाल महोदय ने राजभवन के अधिकारियों को रणनीतिक, क्रियाोन्मुखी और परिणामोन्मुखी होने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संस्थान की सफलता की नींव उसकी टीम वर्क, नवाचार (Innovation) और कार्य संस्कृति पर टिकी होती है।
शिविर के दौरान विशेष समूह चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार-विमर्श हुआ:
पारदर्शी प्रशासन: कामकाज में जवाबदेही और स्पष्टता सुनिश्चित करना।
नवाचार आधारित कार्य संस्कृति: नई तकनीकों और विचारों को अपनाकर कार्यों को सरल बनाना।
समन्वय: अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल से उत्पादकता बढ़ाना।
'आत्मनिर्भर भारत' की ओर बढ़ते कदम
कार्यशाला के उपरांत राज्यपाल ने फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण किया और व्हील शॉप में नवनिर्मित मशीनों का उद्घाटन किया। उन्होंने कोच निर्माण में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीकों को देखा और देश को रेलवे क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए MCF के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि "मेक इन इंडिया" अभियान को सफल बनाने में इस कारखाने की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उपलब्धियों का ब्यौरा
इससे पूर्व, एमसीएफ के महाप्रबंधक श्री रमन कृष्णन ने राज्यपाल महोदय का स्वागत किया और कारखाने द्वारा पिछले वर्षों में हासिल की गई ऐतिहासिक उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रमुख मुख्य यांत्रिक इंजीनियर श्री विवेक खरे ने कोच और व्हील निर्माण की बारीकियों से अवगत कराया।
यह पूरा कार्यक्रम गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जो न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने बल्कि औद्योगिक प्रगति को समझने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हुआ।


