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Raebareli News: पुलिस ने मां की गोद में लौटाया 9 माह का मासूम
टीकमगढ़ की महिला का रायबरेली स्टेशन पर अपहृत हुआ 9 माह का बच्चा पुलिस की तत्परता से सुरक्षित मिला, 9 आरोपी गिरफ्तार।
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Raebareli News: यह कहानी खाकी के पीछे छिपे एक ऐसे मानवीय और संवेदनशील चेहरे को बयां करती है, जो अक्सर सुर्खियों से दूर रह जाता है। आम तौर पर पुलिस की छवि को लेकर समाज में कई तरह की नकारात्मक बातें की जाती हैं, लेकिन रायबरेली में जो हुआ, उसने खाकी के प्रति जनता के भरोसे को और मजबूत कर दिया है।
घटना की पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ की रहने वाली एक गरीब महिला, दिल्ली में अपने पति के साथ रहती थी। पति-पत्नी के बीच हुई किसी अनबन के कारण वह अपने दो बच्चों (एक डेढ़ साल और दूसरा नौ महीने का) को लेकर अकेले मायके जाने के लिए निकल पड़ी। लखनऊ रेलवे स्टेशन पर उसे एक ऐसा जोड़ा (महिला और पुरुष) मिला, जिसने खुद को पति-पत्नी बताकर उससे नजदीकियां बढ़ाईं। सफर के दौरान वे रायबरेली स्टेशन तक साथ आए और वहां मौका पाते ही महिला का नौ महीने का मासूम बच्चा लेकर रफूचक्कर हो गए।
जब देवदूत बनकर आए शहर कोतवाल
अचानक गोद सूनी होने से मां की दुनिया उजड़ गई। वह बिलखती हुई जीआरपी (रेलवे पुलिस) के पास गई, लेकिन वहां उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद वह रोती-बिलखती शहर कोतवाली पहुंची। शुरुआत में वहां भी उसे मामला जीआरपी क्षेत्र का बताकर टालने की कोशिश की गई, लेकिन तभी वहां शहर कोतवाल शिवशंकर सिंह पहुंच गए।
मां की चीखें और आंसू देखकर कोतवाल का दिल पिघल गया। उन्होंने मामले को केवल कानूनी सीमा में न बांधकर मानवीय संवेदना के तौर पर लिया।
तत्परता और बड़ी सफलता
कोतवाल शिवशंकर सिंह ने बिना वक्त गंवाए अपनी टीमों को सक्रिय किया। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद ली गई। पुलिस की मुस्तैदी का नतीजा यह हुआ कि बच्चा चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हो गया। पुलिस ने इस मामले में 5 पुरुषों और 4 महिलाओं समेत कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया, जो बच्चों की खरीद-फरोख्त का एक बड़ा रैकेट चला रहे थे।
लौट आई मां की मुस्कान
कोतवाली में सबसे भावुक पल वह था जब नौ महीने का मासूम बच्चा सुरक्षित तरीके से वापस अपनी मां की गोद में सौंपा गया। बच्चा इतना भूखा था कि उसने अपनी क्षमता से ज्यादा दूध पिया। मां की आंखों से बहते आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे कि रायबरेली पुलिस उसके लिए भगवान बनकर आई थी।
शहर कोतवाल शिवशंकर सिंह और उनकी टीम की यह तत्परता साबित करती है कि पुलिस केवल कानून की रक्षक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी संरक्षक है।


