Raebareli News: रायबरेली में राहुल गांधी करेंगे वीर शिरोमणि वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण

Raebareli News: राही ब्लाक के लोधवारी गांव में राहुल गांधी 1857 के महानायक वीरा पासी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे, जिन्हें अंग्रेजों के खिलाफ साहस और बलिदान के लिए याद किया जाता है।

Narendra Singh
Published on: 19 May 2026 9:34 PM IST
Rahul Gandhi to unveil statue of Veera Pasi in Rae Bareli
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रायबरेली में राहुल गांधी करेंगे वीर शिरोमणि वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण (Photo- Newstrack)

Raebareli News: रायबरेली। सांसद राहुल गांधी कल बीरा पासी की मूर्ति का अनावरण करेंगे। राही ब्लाक के लोधवारी गांव में 1857 के महानायक वीर शिरोमणि वीरा पासी भारत के स्वाधीनता संग्राम के उन अमर सेनानियों में से एक हैं, जिन्होंने 1857 की क्रांति में अपने साहस और बलिदान से इतिहास रच दिया। उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र (मुख्यतः रायबरेली) से ताल्लुक रखने वाले वीरा पासी अदम्य साहस, छापामार युद्ध कला और वफादारी के प्रतीक थे।


​राजा बेनी माधव सिंह के अंगरक्षक

​वीरा पासी रायबरेली के शंकरपुर के महान स्वतंत्रता सेनानी राणा बेनी माधव सिंह के अंगरक्षक और प्रमुख सेनापति थे। वीरा पासी का निशाना अचूक था और वे तीर-कमान व लाठी चलाने में माहिर थे। जब 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला भड़की, तो राणा बेनी माधव सिंह के साथ मिलकर वीरा पासी ने अंग्रेजी सेना की नाक में दम कर दिया।

​ऐतिहासिक पराक्रम और अंग्रेजों को चुनौती

​वीरा पासी से जुड़ा सबसे गौरवशाली प्रसंग तब का है, जब अंग्रेजों ने राणा बेनी माधव सिंह को चारों तरफ से घेर लिया था। अपने राजा की जान खतरे में देख वीरा पासी ने अकेले ही अंग्रेजी सेना पर धावा बोल दिया।

उन्होंने अपनी सूझबूझ और छापामार रणनीति से अंग्रेजी खेमे में खलबली मचा दी। उन्होंने न केवल राणा बेनी माधव सिंह को अंग्रेजों के चक्रव्यूह से सुरक्षित बाहर निकाला, बल्कि अकेले ही कई ब्रिटिश सैनिकों को धूल चटा दी। ​अंग्रेजी हुकूमत वीरा पासी के नाम से इस कदर खौफ खाती थी कि उन्हें पकड़ने के लिए उस जमाने में 50,000 रुपये का इनाम रखा गया था, जो उनकी ताकत और प्रभाव को दर्शाता है।


​विरासत और सम्मान

​इतिहास के पन्नों में भले ही वीरा पासी जैसे दलित और वंचित समाज से आने वाले नायकों को वह स्थान न मिला हो जिसके वे हकदार थे, लेकिन जनमानस के गीतों और लोककथाओं में वे आज भी जीवित हैं। वर्तमान में सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा उनकी जयंती पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और उन्हें एक राष्ट्रीय नायक के रूप में याद किया जाता है। वीरा पासी का जीवन हमें सिखाता है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए समर्पण और वीरता किसी पहचान की मोहताज नहीं होती।

Shashi kant gautam

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