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दर्द, डेटा और दौलत...प्रयागराज में छात्रों के बीच राहुल गांधी, सरकार को जमकर घेरा, किया बड़ा दावा
Rahul Gandhi Prayagraj Speech: प्रयागराज के केपी कॉलेज मैदान में छात्रों की सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने 'दर्द, डेटा और दौलत' के जरिए युवाओं के मुद्दे उठाए। उन्होंने रोजगार, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, डेटा और AI को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कई बड़े दावे किए।
Rahul Gandhi Prayagraj Speech: संगम नगरी प्रयागराज के केपी कॉलेज मैदान में आयोजित 'छात्रों की गूंज' सभा में राहुल गांधी ने मंच संभालते ही युवाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने कहा कि एक जमाना था जब इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को पूरे हिंदुस्तान में शिक्षा का सबसे बड़ा और श्रेष्ठ केंद्र माना जाता था। उन्होंने उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे आज केवल तीन मुख्य मुद्दों... दर्द, डेटा और दौलत पर खुलकर बात करने आए हैं। विपक्ष के नेता ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी युवा शक्ति है। यदि हम अमेरिका, रूस और चीन जैसी वैश्विक शक्तियों से तुलना करें, तो भारत के नौजवानों के सामर्थ्य के सामने ये देश बहुत पीछे छूट जाते हैं।
1000 में से सिर्फ 12 युवाओं को मिल पा रही पक्की नौकरी
देश में रोजगार की भयावह स्थिति का खुलासा करते हुए राहुल गांधी ने चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की वर्तमान नीतियों के कारण आज बेरोजगारी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि देश में स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि प्रति 1000 युवाओं में से केवल 12 लोगों को ही स्थाई और सुरक्षित काम मिल पा रहा है। वहीं प्रतियोगिता परीक्षाओं और सरकारी नौकरी के अवसरों की बात करें तो स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां 150 नौजवानों में से मात्र 1 व्यक्ति को ही नौकरी मिल पाती है। राहुल ने इसे देश का सबसे कड़वा और दुखद सच बताया।
'मेड इन इंडिया' गायब, हर तरफ केवल 'मेड इन चाइना' का कब्जा
संसद में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि देश के लाखों-करोड़ों युवा दिन-रात मेहनत करके पढ़ाई करते हैं और उनके परिवार अपनी गाढ़ी कमाई शिक्षा पर खर्च करते हैं। इसके बावजूद रोजगार पाने के सारे रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। आज वैश्विक बाजार में 'मेड इन इंडिया' सामान नजर नहीं आता, बल्कि 'मेड इन चाइना' और 'मेड इन बांग्लादेश' का बोलबाला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 2016 की नोटबंदी और जल्दबाजी में लागू किए गए जीएसटी ने देश के छोटे व्यापारियों और छोटे उद्योगों की रीढ़ तोड़ दी, जिससे नौकरियां देने वाले छोटे बिजनेस तबाह हो गए।
40 करोड़ युवा देश का गौरव
युवाओं के हौसले को बढ़ाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के 40 करोड़ ऊर्जावान युवा ही भारत की असली पहचान, पूंजी और स्वाभिमान हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल मैदान में जुटी भीड़ की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि देश के हर नागरिक और हर एक छात्र की प्रतिभा की बात कर रहे हैं। राहुल गांधी के अनुसार भारत के युवाओं में सोचने की अद्भुत क्षमता, बुद्धिमत्ता और अपार कल्पनाशीलता है। अगर देश का मौजूदा प्रशासनिक सिस्टम उनके रास्ते में रुकावट डालना बंद कर दे, तो इन्हीं युवाओं की क्षमता के बल पर भारत दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
21वीं सदी में डेटा ही नई दौलत
आधुनिक तकनीक और 21वीं सदी का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी ने डेटा के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने समझाया कि आज के दौर में किसी भी देश की प्रगति दो चीजों पर टिकी है... पहली युवा क्षमता और दूसरा डेटा। भारत में हर नागरिक प्रतिदिन लगभग 1 गीगाबाइट डेटा उत्पन्न करता है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे 20वीं सदी में पेट्रोल के बिना किसी गाड़ी के इंजन का कोई मूल्य नहीं था, ठीक वैसे ही भारतीय युवाओं द्वारा जनरेट किए गए डेटा के बिना AI का निर्माण असंभव है। यह डेटा देश की सबसे बड़ी संपत्ति है।
लाखों रुपये खर्च कर मिली डिग्रियों की बची नहीं कोई कीमत
वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं की बदहाली पर हमला करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज का सिस्टम पूरी तरह से खोखला हो चुका है। छात्र भारी फीस भरकर और कर्ज लेकर मेडिकल, इंजीनियरिंग या बीए, एमए जैसी डिग्रियां हासिल करते हैं, लेकिन परीक्षा पूरी होते ही या तो पेपर लीक हो जाता है या फिर रिजल्ट अटक जाता है। आज इन कागजी सर्टिफिकेट्स की कोई वैल्यू नहीं रह गई है क्योंकि ये किसी को काम की गारंटी नहीं दे सकते।
सरकारी नीतियों के चक्रव्यूह में घुट रहा है नौजवानों का भविष्य
अपने भाषण के अंतिम पड़ाव में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की मंशा पर सीधे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास हुनर और जज्बा दोनों मौजूद हैं, लेकिन वर्तमान सिस्टम ने उन्हें एक सोचे-समझे चक्रव्यूह के अंदर कैद कर दिया है। युवाओं का हक और जो दौलत उनके विकास पर खर्च होनी चाहिए थी, वह गलत नीतियों के कारण आम जनता तक नहीं पहुंच पा रही है। उन्होंने छात्रों से एकजुट होकर अपने अधिकारों और उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।


