राम मंदिर में पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति, देश का 7वां ऐसा प्रमुख तीर्थ स्थल बना

Ram Janmabhoomi: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में पहली बार CEO की नियुक्ति से प्रशासनिक व्यवस्था को पेशेवर स्वरूप मिलेगा। तिरुपति, वैष्णो देवी और काशी विश्वनाथ समेत छह प्रमुख मंदिरों में भी यह मॉडल लागू है।

Newstrack Network
Published on: 3 Sept 2026 6:46 PM IST (Updated on: 3 Sept 2026 6:47 PM IST)
Ram Mandir
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Ram Janmabhoomi Ayodhya: अयोध्या स्थित भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर में प्रशासनिक व्यवस्था को पूर्णतः पेशेवर स्वरूप देते हुए पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की गई है। इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही राम मंदिर देश का ऐसा 7वां प्रमुख धार्मिक संस्थान बन गया है, जहाँ धार्मिक अनुष्ठान/मार्गदर्शन और मंदिर के रोजमर्रा के वित्तीय व नागरिक प्रशासन को अलग-अलग तंत्र के तहत संचालित किया जाएगा।

नए ढांचे के तहत ट्रस्ट अथवा न्यास नीतिगत निर्णय लेगा, जबकि प्रशासनिक क्रियान्वयन, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी पेशेवर प्रशासनिक अधिकारी के हाथ में होगी।

देश के अन्य 6 प्रमुख मंदिरों में पहले से लागू है प्रशासनिक मॉडल

देश के विभिन्न शीर्ष धार्मिक स्थलों में इसी तरह की व्यवस्था वर्षों से सुचारू रूप से कार्य कर रही है:

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (आंध्र प्रदेश): यहाँ प्रशासनिक प्रमुख का पदनाम एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (EO) है। उनके अधीन दो संयुक्त ईओ, मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी (CVSO), वित्तीय सलाहकार और मुख्य अभियंता की एक पूरी पेशेवर टीम काम करती है।

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (जम्मू-कश्मीर): यहाँ प्रशासन की कमान सीईओ और एडिशनल सीईओ के हाथों में है। पूरे यात्रा मार्ग और भवन क्षेत्र को सेक्टरों में बाँटकर जोनल हेड्स के माध्यम से श्रद्धालुओं की सुविधाओं और भीड़ नियंत्रण की निगरानी की जाती है।

श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी (ओडिशा): यहाँ व्यवस्थापक को चीफ एडमिनिस्ट्रेटर (मुख्य प्रशासक) कहा जाता है। कानूनन वही प्रबंध समिति का सचिव और मुख्य कार्यकारी होता है, जो मंदिर के स्वर्ण-आभूषणों, धन की अभिरक्षा और सेवकों के अनुशासन का प्रबंधन देखता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश): 'काशी विश्वनाथ धाम' के निर्माण के बाद यहाँ सीईओ मॉडल को और प्रभावी बनाया गया है। चढ़ावे की पारदर्शी गणना, बैंकिंग चैनल प्रबंधन और लाखों तीर्थयात्रियों की कतार प्रबंधन का दायित्व सीईओ के अधीन है।

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (उत्तराखंड): दोनों पवित्र धामों का प्रबंधन सीईओ के अधीन संचालित होता है। दान-चढ़ावे की डिजिटल रसीद, 80जी प्रमाणपत्र और ऑनलाइन बुकिंग से लेकर आंतरिक अनुशासन तक की सीधी निगरानी सीईओ करते हैं।

सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट, मुंबई (महाराष्ट्र): 1980 के राज्य अधिनियम के अंतर्गत गठित इस ट्रस्ट में दैनिक व्यवस्था का दायित्व कार्यकारी अधिकारी (Executive Officer) संभालते हैं, जिनके अंतर्गत लेखा, दान गणना और सुरक्षा के अलग-अलग विभाग काम करते हैं।

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