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राम मंदिर CEO की कुर्सी पर कौन बैठेगा? रेस में सबसे आगे UP के ये 2 चर्चित IAS, जल्द लग सकती है मुहर!
Ram Mandir CEO Final: अयोध्या राम मंदिर के नए CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच गई है। 5,585 आवेदनों से शुरू हुई चयन प्रक्रिया के बाद 3 नामों का पैनल तैयार हुआ है।
Ram Mandir CEO Final: अयोध्या में स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की तलाश अब अपने आखिरी पड़ाव पर आ गई है। नए सीईओ को चुनने के लिए सभी उम्मीदवारों के इंटरव्यू पूरे कर लिए गए हैं। चयन समिति ने अंतिम रूप से 3 योग्य उम्मीदवारों का एक छोटा पैनल तैयार किया है। इस अंतिम सूची को जल्द ही ट्रस्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। इस बेहद महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरे पद को हासिल करने की दौड़ में उत्तर प्रदेश के 2 बेहद अनुभवी और चर्चित अधिकारियों के नाम सबसे ऊपर चल रहे हैं।
कौन हैं सबसे मजबूत दावेदार
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस प्रतिष्ठित पद के लिए योगेश्वर राम मिश्रा और पूर्व पुलिस अधिकारी राजेश पांडे के नाम पर सबसे गंभीरता से विचार हो रहा है। योगेश्वर राम मिश्रा राज्य प्रशासनिक सेवा से प्रोन्नत होकर आईएएस बने हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के भव्य निर्माण और उसके शुरुआती प्रबंधन में उनकी मुख्य भूमिका रही है। धार्मिक स्थलों के सुगम संचालन का उनका पिछला अनुभव उन्हें इस दौड़ में बेहद मजबूत बनाता है। वहीं दूसरी ओर, पूर्व आईपीएस राजेश पांडे राज्य के एक निडर, बेहद ईमानदार और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं।
धार्मिक संस्थाओं के संचालन में प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता
देश के बड़े और प्रतिष्ठित धार्मिक मंदिरों के प्रबंधन का इतिहास देखें तो सरकार अक्सर प्रशासनिक अनुभव वाले अफसरों पर ही भरोसा जताती रही है। उदाहरण के लिए, काशी विश्वनाथ ट्रस्ट की जिम्मेदारी भी प्रांतीय सेवा के अधिकारी संभाल रहे हैं। राम मंदिर जैसे विशाल और अंतरराष्ट्रीय स्तर के धार्मिक केंद्र के लिए भी एक ऐसे ही कुशल, ईमानदार और निष्ठावान व्यक्ति की आवश्यकता है। योगेश्वर राम मिश्रा और राजेश पांडे दोनों ही अफसर मंदिर प्रबंधन और बड़ी व्यवस्थाओं को संभालने के मामले में इन सभी पैमानों पर बिल्कुल सटीक बैठते हैं।
पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी दी कड़ी चुनौती
यद्यपि नौकरशाहों का पलड़ा इस रेस में भारी दिख रहा है, परंतु भारतीय सेना के कई सेवानिवृत्त अधिकारियों ने भी इस पद के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है। अंतिम चरण के लिए चुने गए 16 प्रमुख अभ्यर्थियों में कई पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने इंटरव्यू में बेहतरीन प्रदर्शन किया। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि अंत में किसी पूर्व सैन्य अधिकारी के नाम की घोषणा हो जाती है तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि शॉर्टलिस्ट हुई इस पूरी प्रक्रिया में एक भी महिला अभ्यर्थी का नाम सामने नहीं आया है।
5,585 आवेदनों से शुरू हुआ था चयन का लंबा सफर
राम मंदिर के नए सीईओ का चुनाव बेहद निष्पक्ष और कठिन प्रक्रियाओं से गुजरकर पूरा हुआ है। इस पद के लिए देश भर से कुल 5,585 लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें से 3,877 उम्मीदवारों ने अपना पूरा विवरण जमा कराया था। पहले चरण में छंटनी के बाद 1,580 उम्मीदवारों की योग्यताओं का गहरा मूल्यांकन हुआ, जिसके बाद 111 लोगों के साथ ऑनलाइन वार्ता की गई। इसमें से चुने गए अंतिम 16 दिग्गजों का आमने-सामने इंटरव्यू लिया गया। अब इसी में से 3 सर्वश्रेष्ठ नाम चुने गए हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट ही लेगा अंतिम निर्णय
अब इन 3 चुने गए नामों में से किसके सिर पर सीईओ का ताज सजेगा, इसका पूरा और अंतिम अधिकार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास ही सुरक्षित है। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य बैठक करके किसी एक नाम पर अपनी अंतिम स्वीकृति देंगे। बोर्ड की अंतिम मुहर लगते ही देश के सबसे बड़े और पावन धार्मिक स्थल के दैनिक प्रबंधन, सुरक्षा और व्यवस्था की पूरी कमान नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के मजबूत हाथों में सौंप दी जाएगी।


