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अखिलेश के घर पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, बंद कमरे में सीक्रेट मीटिंग… क्या पक रही है खिचड़ी?
Akhilesh-Pramod Tiwari Meeting: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं। सपा प्रमुख के आवास पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की बंद कमरे में हुई मुलाकात ने सीट शेयरिंग और चुनावी रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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Akhilesh-Pramod Tiwari Meeting: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election) को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है। यूपी में एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन (Congress-SP Alliance) को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव से मुलाकात की है। प्रमोद तिवारी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में माने जाते हैं। वह अपनी बेटी आराधना मिश्रा के साथ अखिलेश यादव से मिलने उनके आवास पहुंचे थे।
इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में सीक्रेट मीटिंग (Secret Meeting) हुई। इस मुलाकात के बाद यूपी के सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। खास बात यह है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट शेयरिंग (Seat Sharing) को लेकर बातचीत शुरू होने वाली है।
सीट शेयरिंग से पहले सीक्रेट मीटिंग ने बढ़ाई बेचैनी
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच अभी सीटों के बंटवारे को लेकर औपचारिक चर्चा शुरू होनी बाकी है। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सपा प्रमुख के बीच हुई इस बंद कमरे की बैठक ने दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मुलाकात को लेकर दोनों दलों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सियासी गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सीट शेयरिंग पर बातचीत शुरू होने से पहले दोनों नेताओं के बीच ऐसी कौन सी बात हुई, जिसके लिए बंद कमरे में बैठक की जरूरत पड़ी।
हालांकि, अखिलेश यादव के करीबियों का कहना है कि यह सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात (Courtesy Meeting) थी। इसका किसी राजनीतिक फैसले या चुनावी गठबंधन से कोई लेना-देना नहीं है।
संगठन मजबूत करने पर सपा का जोर
अखिलेश यादव के करीबियों के मुताबिक, फिलहाल समाजवादी पार्टी का पूरा जोर पार्टी संगठन को मजबूत करने पर है। इसके लिए संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
उनका कहना है कि कांग्रेस केवल चुनाव के समय ही जनता के बीच नहीं रहती, बल्कि बाकी समय भी लोगों के बीच सक्रिय रहती है। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की अखिलेश यादव से मुलाकात को सामान्य राजनीतिक संवाद और शिष्टाचार के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन बंद दरवाजे के पीछे हुई इस बैठक ने राजनीतिक चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।
क्या राहुल गांधी को थी बैठक की जानकारी?
प्रमोद तिवारी और अखिलेश यादव की इस मुलाकात के बाद एक और सवाल सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों के बीच यह चर्चा है कि क्या कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इस बैठक की जानकारी पहले से थी।
इसके साथ ही यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की यह मुलाकात राहुल गांधी के ही कहने पर हुई थी। फिलहाल इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन बैठक को लेकर राजनीतिक अटकलें लगातार जारी हैं।
BJP छोटे दलों को साथ लाने की तैयारी में?
दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने बीते दिनों भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी (BJP) को लेकर भी बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने सहयोगी दलों के लिए सीट बंटवारे की योजना पर काम कर रही है। अखिलेश यादव ने दावा किया था कि बीजेपी की यह कवायद सफल नहीं होगी, क्योंकि जनता ने सत्तारूढ़ दल को पूरी तरह नकार दिया है।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर एक पोस्ट में सूत्रों के हवाले से बीजेपी की संभावित सीट शेयरिंग का जिक्र किया था। अखिलेश यादव के मुताबिक, बीजेपी कुछ चुनाव विशेषज्ञों की सलाह पर अपने सहयोगी दलों को अलग-अलग सीटें देने पर विचार कर रही है।
RLD से अपना दल तक के लिए संभावित सीटों का दावा
अखिलेश यादव ने दावा किया कि बीजेपी राष्ट्रीय लोक दल यानी आरएलडी (RLD) को 73 सीट, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यानी सुभासपा (SBSP) को 39 सीट, निषाद पार्टी (Nishad Party) को 31 सीट और अपना दल (Apna Dal) को 19 सीट देने पर विचार कर रही है।
अखिलेश यादव ने प्रस्तावित सीट बंटवारे की व्यवस्था को सराहनीय बताया, लेकिन साथ ही दावा किया कि यह सीट बंटवारा पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए (PDA) वर्गों की आबादी के अनुपात में मिलने वाले प्रतिनिधित्व के आधे से भी कम है।
भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी पर BJP को घेरा
अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर कई मुद्दों को लेकर हमला बोला। उन्होंने भ्रष्टाचार (Corruption), महंगाई (Inflation), बेरोजगारी (Unemployment), शिक्षा (Education), स्वास्थ्य सेवाओं (Healthcare), बिजली (Electricity), सड़क (Roads) और भर्ती (Recruitment) जैसे मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर सरकार के रिकॉर्ड के कारण बीजेपी की यह सीट बंटवारे की योजना भी विफल हो जाएगी।
ऐसे में यूपी विधानसभा चुनाव से पहले एक तरफ बीजेपी अपने सहयोगी दलों को साथ रखने की रणनीति पर काम करती नजर आ रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अखिलेश यादव के बीच हुई बंद कमरे की मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। हालांकि, अभी तक दोनों पार्टियों की तरफ से इस मुलाकात को गठबंधन या सीट शेयरिंग से जोड़कर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और दोनों दल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए किस तरह की रणनीति तैयार करते हैं।


