Shamli News: डिलीवरी के दौरान पेट में छोड़ा कपड़ा, महिला की मौत के बाद हंगामा

Shamli News: शामली के निजी अस्पताल में डिलीवरी के दौरान महिला के पेट में कपड़ा छोड़ने का आरोप, दोबारा ऑपरेशन में कपड़ा निकला, संक्रमण बढ़ने से मौत हुई।

Pankaj Prajapati
Published on: 30 May 2026 6:11 PM IST
Left cloth in stomach during delivery
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डिलीवरी के दौरान पेट में छोड़ा कपड़ा, महिला की मौत के बाद हंगामा (Photo- Newstrack)

Shamli News: कमाई के लालच में इंसान इतना अंधा होता जा रहा है कि बिना पर्याप्त ज्ञान और जिम्मेदारी के अस्पताल चलाए जा रहे हैं। ऐसे मामलों पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी भी सवालों के घेरे में है। शामली जनपद में सामने आए एक मामले ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि डिलीवरी के दौरान एक महिला के पेट में कपड़ा छोड़ दिया गया, जिसके कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई। इतना ही नहीं, महिला के पेट से ऑपरेशन के दौरान कपड़ा निकाले जाने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

डिलीवरी के लिए अस्पताल में कराया गया था भर्ती

पूरा मामला सदर कोतवाली क्षेत्र के दिल्ली रोड स्थित एक प्राइवेट अस्पताल का है। जानकारी के अनुसार थानाभवन क्षेत्र के गांव उस्मानपुर निवासी छत्रपाल ने बीती 20 मई को अपनी पत्नी रितिका को डिलीवरी के लिए शामली के आनंद अस्पताल में भर्ती कराया था। अस्पताल में डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि महिला की डिलीवरी सामान्य तरीके से संभव नहीं है और ऑपरेशन करना जरूरी होगा।

डॉक्टरों की सलाह पर महिला का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद रितिका ने एक शिशु को जन्म दिया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य बताया गया, लेकिन इसके बाद महिला की तबीयत लगातार बिगड़ने लगी।


ऑपरेशन के बाद बिगड़ती गई हालत

परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद से ही रितिका की स्थिति लगातार खराब होती चली गई। उसका रक्तस्राव भी नहीं रुक रहा था। हालत बिगड़ती देख अस्पताल के डॉक्टर महिला को रात में ही अपनी गाड़ी से मेरठ स्थित अपने एक परिचित अस्पताल में लेकर पहुंचे और वहां भर्ती करा दिया।

परिवार के लोगों का कहना है कि महिला करीब दो दिन तक वहां भर्ती रही, लेकिन उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसके पति ने मेरठ के ही एक दूसरे अस्पताल में उसे भर्ती कराया, जहां जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही

परिजनों के मुताबिक दूसरे अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि महिला के पेट में छेद है और उसके अंदर कपड़ा छोड़ा गया है। यह जानकारी सामने आने के बाद महिला का दोबारा ऑपरेशन किया गया।

ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने महिला के पेट से कपड़ा निकाला। इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो भी सामने आया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो के वायरल होने के बाद मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया है।

संक्रमण फैलने से चली गई महिला की जान

बताया जा रहा है कि जब तक महिला के पेट से कपड़ा निकाला गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी। कपड़ा लंबे समय तक पेट के अंदर रहने के कारण संक्रमण तेजी से फैल चुका था। संक्रमण की वजह से महिला की हालत और ज्यादा गंभीर हो गई। महिला के पेट से कपड़ा निकाले जाने के कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो गई। एक नवजात को जन्म देने वाली मां की मौत से परिवार में मातम पसर गया।

आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े परिजन

महिला की मौत के बाद गुस्साए परिजन शव को लेकर शहर कोतवाली पहुंच गए और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए जमकर हंगामा किया। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही के कारण रितिका की जान गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने महिला के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव घर पहुंच गया, लेकिन परिजनों ने अभी तक अंतिम संस्कार नहीं किया है।

मुकदमा दर्ज होने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की चेतावनी

परिजनों ने साफ कर दिया है कि जब तक आरोपी डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा, तब तक वे रितिका का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। परिवार न्याय की मांग पर अड़ा हुआ है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई चाहता है। इस बीच राहत की बात यह है कि नवजात शिशु का स्वास्थ्य ठीक बताया जा रहा है।

पहले भी उठ चुके हैं अस्पताल पर सवाल

गौरतलब है कि संबंधित अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग सब कुछ जानने के बावजूद अनजान बना रहता है, जिसका खामियाजा आम और भोले-भाले मरीजों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।

अब इस मामले ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Shashi kant gautam

Shashi kant gautam

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Experienced Hindi Journalist with 6 Years of Experience

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