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Shravasti News: डिजिटल लाइब्रेरी का प्लान कागजों पर, युवाओं को तैयारी के लिए जाना पड़ रहा बाहर
Shravasti News: श्रावस्ती में डिजिटल लाइब्रेरी की योजना अब भी कागजों तक सीमित है। बेहतर अध्ययन सुविधाओं के अभाव में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है।
Shravasti News(Photo-Social Media)
Shravasti News: नेपाल सीमा से लगे श्रावस्ती जिले में पुस्तकालयों की हालत खराब है। पूरे जिले में सिर्फ एक राजकीय जिला पुस्तकालय चालू है, जहां सुविधाएं बेहद सीमित हैं। सरकार ने 322 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी का ऐलान तो किया, लेकिन जमीन पर काम धीमा है। तमाम शिक्षाविदों , अधिवक्ताओं और बुद्धि जीवियों का कहना है जब जिला में कोई बड़ा कार्यक्रम होता है या जब कोई भारत व राज्य सरकार का सचिव यहां आता तो शिक्षा स्वास्थ्य का सभी बातें करते हैं यहां तक जब कोई नया डीएम यहां आता है तो शिक्षा और स्वास्थ्य की बातें बड़ी बड़ी करता है पर धरातल पर कोई लागू नहीं कर पाता है।इससे यहां का टैंलेंट बैक हो जाता है।
जिले में कितने पुस्तकालय- राजकीय जिला पुस्तकालय:सिर्फ एक,स्थापना 2009-10 में हुई। समय सुबह 9 से शाम 5, रविवार बंद।
डिजिटल लाइब्रेरी: 322 ग्राम पंचायतों में प्रस्तावित। इसमें पहले चरण में 161 गांवों में 6.44 करोड़ की लागत से काम शुरू होना है। दूसरे चरण में बाकी 161 गांव। अभी तक एक भी डिजिटल लाइब्रेरी चालू नहीं।
वर्तमान सुविधाएं नाकाफी:
राजकीय जिला पुस्तकालय में सिर्फ 3 कर्मचारी हैं। कुल किताबें 5976 हैं 2342 भौतिक + 3634 ई-बुक। मासिक उपयोगकर्ता मात्र 35 हैं। सेवाओं में सिर्फ किताब जारी/वापसी और शांत वाचनालय शामिल है। वहीं पीलीभीत में 42000 ई-बुक और 4 स्टाफ हैं, तुलना में श्रावस्ती काफी पीछे।
क्या सुविधाएं होनी चाहिए:
स्टाफ व किताबें बढ़ें: बुद्धि जीवियों का कहना है कि कम से कम 15 हजार नई किताबें, UPSC, SSC, NEET, JEE की तैयारी सामग्री भी होनी चाहिए।
डिजिटल सुविधा: कंप्यूटर, वाई-फाई, ई-बुक एक्सेस। 2025-26 में ई-लाइब्रेरी के लिए 808 लाख का बजट है। समय बढ़े: सुबह 9-5 से छात्रों को दिक्कत, शाम 7-8 बजे तक खुलना चाहिए। बच्चों-महिलाओं के लिए अलग सेक्शन और करियर गाइडेंस होना चाहिए। मोबाइल लाइब्रेरी:सिरसिया, इकौना, हरिहरपुररानी, गिलौला जैसे दूरदराज ब्लॉकों तक पहुंच होनी नितांत आवश्यक है।
क्यों नहीं हो पा रहीं: प्रमुख समस्याएं
जागरूकता की कमी:
मासिक उपयोगकर्ता सिर्फ 35, ग्रामीण छात्रों को पता ही नहीं कि पुस्तकालय है।
स्टाफ व बजट कम:3 कर्मचारियों से बड़ा पुस्तकालय चलाना मुश्किल हो रहा है।
डिजिटल लाइब्रेरी में देरी:
322 में से 161 का काम भी कागजों पर, उपकरण पहुंचने में 90 दिन का नियम पर अमल नहीं हुआ है।
किताबों की आपूर्ति ठप: स्कूलों में भी कक्षा 1-3 की किताबें 1 माह बाद तक नहीं पहुंचीं है।
बिजली-इंटरनेट: गांवों में कनेक्टिविटी समस्या, 20 हजार इंटरनेट बजट के बावजूद सुविधा न के बराबर है।
DPRO नंदलाल का बयान:
डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इससे ग्रामीण युवाओं को शिक्षा में आगे बढ़ने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर ग्राम सचिवालय में 4 लाख की डिजिटल लाइब्रेरी बना रही है।2 लाख कंप्यूटर-टीवी पर, 1.8 लाख किताबों पर खर्च होंगे। लेकिन जब तक स्टाफ, प्रचार और समय पर क्रियान्वयन नहीं होगा, श्रावस्ती के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए लखनऊ-दिल्ली का रुख करना ही पड़ेगा। साथ ही यहां के जनप्रतिनिधियों को पुस्तकालयों की समास्याओं पर ऊपरी स्तर पर काम करना चाहिए।


