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Shravasti News: सनातन संस्कृति में ध्वनि का विज्ञान: मंदिर के घंटे-शंख और खेत के ड्रम का रहस्य
Shravasti News: श्रावस्ती में सनातन संस्कृति में ध्वनि के महत्व को समझिए। मंदिरों के घंटे, शंख और खेतों में बजने वाले ड्रम के पीछे छिपे धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक पहलुओं पर एक नजर।
Shravasti News(Photo-Social Media)
Shravasti News: सनातन धर्म की हर परंपरा के पीछे आस्था के साथ-साथ एक सुव्यवस्थित विज्ञान भी है। मंदिर में बजने वाला घंटा, शंखनाद और फसली खेतों में बजने वाला ढोल-ड्रम, तीनों का मूल एक ही है - नाद विज्ञान।
मंदिर में घंटे का विज्ञान:
शास्त्रों में कहा गया है .आगमार्थं तु देवानां गमनार्थं तु रक्षसाम्। अर्थात देव आह्वान और राक्षसी प्रवृत्ति के नाश के लिए घंटा। वैज्ञानिक शोध कहते हैं कि कांस्य धातु से बने मंदिर के घंटे की ध्वनि 110 डेसिबल की तीव्रता के साथ 7 सेकंड तक गूंजती है। इससे मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध सक्रिय होते हैं, एकाग्रता बढ़ती है और सातों चक्र जागृत होते हैं। इसकी गूंज वातावरण के हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करती है और नकारात्मक आभा को शुद्ध करती है।
शंख का दिव्य-वैज्ञानिक आधार: समुद्र मंथन से उत्पन्न शंख विष्णु-लक्ष्मी को प्रिय है। शंख बजाने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और प्राणायाम का अभ्यास स्वतः होता है। शंख में रात भर रखा जल औषधीय हो जाता है, इसमें कैल्शियम, फास्फोरस मौजूद होते हैं जो ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं। इसकी ध्वनि 2 किलोमीटर तक जाकर पर्यावरण को शुद्ध करती है। महामारी के समय शंखनाद इसी विज्ञान पर आधारित था। वैज्ञानिक मानते हैं कि इसकी आवृत्ति ब्रह्मांड की मूल ध्वनि 'ओम' के समान है।
खेतों में ड्रम बजाने की परंपरा: पूर्वांचल और श्रावस्ती-बलरामपुर में आज भी किसान फसल पकने पर ढोल-ड्रम बजाते हैं। यह अंधविश्वास नहीं, बल्कि जैविक नियंत्रण है। तेज आवाज से पक्षी और टिड्डी दल दूर भागते हैं। जगदीश चंद्र बसु ने सिद्ध किया था कि पौधे ध्वनि महसूस करते हैं। 70 डेसिबल की लयबद्ध ध्वनि से पौधों के रंध्र खुलते हैं और प्रकाश संश्लेषण तेज होता है, जिससे पैदावार 20% तक बढ़ती है। साथ ही यह सामूहिक कृषि उत्सव का प्रतीक भी है।
निष्कर्ष: आज जिसे साउंड थेरेपी और अल्ट्रासोनिक पेस्ट कंट्रोल कहा जा रहा है, उसे ऋषियों ने हजारों साल पहले स्थापित कर दिया था। घंटा भीतर से जगाता है, शंख बाहर से शुद्ध करता है और खेत का ड्रम अन्नदात्री की रक्षा करता है।


