Shravasti News: मिठाई के साथ डिब्बा तौलने पर उठे सवाल, ग्राहकों की जेब पर डाका

Shravasti News: श्रावस्ती में मिठाइयों के साथ डिब्बा तौलकर ग्राहकों से वसूली का मामला। नापतौल विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल।

Radheshyam Mishra
Published on: 4 Nov 2026 8:48 PM IST
Shravasti News:  मिठाई के साथ डिब्बा तौलने पर उठे सवाल, ग्राहकों की जेब पर डाका
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Shravasti News : दिपावली त्योहार आते ही एक सवाल फिर से होनी शुरू हो गई है।त्योहारों का मौसम आते ही तराई के बाजारों में मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है। लोग परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों के लिए मिठाइयां खरीदते हैं, लेकिन इस मिठास के कारोबार में ग्राहकों की जेब पर चुपचाप कैंची चलाई जा रही है। शिकायत है कि मिठाई के साथ डिब्बे का वजन भी मिठाई के भाव में तौलकर ग्राहकों से पूरे पैसे वसूले जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, कई दुकानों पर मिठाई को डिब्बे समेत तराजू पर चढ़ाया जा रहा है। ग्राहक जितना वजन समझकर भुगतान करता है, उसमें डिब्बे का वजन भी शामिल रहता है। यानी ग्राहक मिठाई के दाम पर डिब्बा भी खरीदने को मजबूर है। यदि किसी डिब्बे का वजन 150 से 175 ग्राम है, तो मिठाई के निर्धारित भाव के हिसाब से ग्राहक को उतनी मात्रा की मिठाई के पैसे भी चुकाने पड़ते हैं, जबकि उसे वास्तव में मिठाई कम मिलती है।

आखिर कब जागेगा नापतौल विभाग?

ग्राहक रामदीन, शिवप्रसाद, राजेश कुमार का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इस तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो नापतौल विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिख रही? क्या विभाग को इस समस्या की जानकारी नहीं है या शिकायतों के बावजूद जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?

सूत्रों का दावा है कि कुछ दुकानदारों के यहां यह खेल लंबे समय से चल रहा है। हालांकि विभागीय मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन कार्रवाई के अभाव ने इन आशंकाओं को जरूर हवा दी है।

नापतौल विभाग की जिम्मेदारी केवल बाट और तराजू की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को सही वजन और सही कीमत दिलाना भी उसकी जिम्मेदारी है। यदि ग्राहक मिठाई के नाम पर डिब्बे का वजन खरीद रहा है, तो यह सीधे तौर पर उपभोक्ता के हितों से जुड़ा गंभीर मामला है।

150 से 175 ग्राम का डिब्बा, कीमत मिठाई के भाव!

मान लीजिए कोई ग्राहक एक किलो मिठाई खरीदता है और मिठाई के साथ डिब्बे का वजन भी एक किलो में शामिल कर दिया जाता है। यदि डिब्बे का वजन 150 से 175 ग्राम है, तो ग्राहक को निर्धारित कीमत चुकाने के बावजूद वास्तविक मिठाई लगभग 825 से 850 ग्राम ही मिलेगी। इस तरह ग्राहक को हर खरीदारी पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। बड़े पैमाने पर होने वाली ऐसी खरीदारी में दुकानदारों को अतिरिक्त फायदा और ग्राहकों को नुकसान होने की आशंका है।

त्योहारों पर ही क्यों नहीं होती सख्त जांच?

त्योहारों के दौरान मिठाइयों की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में खाद्य सुरक्षा विभाग के साथ-साथ नापतौल विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। ग्राहकों तथा समाजसेवियों का कहना है कि बाजारों में नियमित निरीक्षण, इलेक्ट्रॉनिक कांटों की जांच और मिठाई के वास्तविक वजन का सत्यापन होना चाहिए। इसके बावजूद यदि दुकानदार अपनी मनमर्जी से मिठाई के साथ डिब्बा तौल रहे हैं, तो यह विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्राहकों का कहना है कि डीएम और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों को इस मामले का संज्ञान लेकर मिठाई की दुकानों पर औचक निरीक्षण कराना चाहिए। जांच में यदि मिठाई के साथ डिब्बे का वजन जोड़कर कीमत वसूलने की पुष्टि होती है, तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही विभागीय कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि मिलीभगत के आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।

आखिर कब तक मिठाई के नाम पर ग्राहक डिब्बे का वजन खरीदता रहेगा? सवाल सिर्फ 150 या 175 ग्राम डिब्बे का नहीं, बल्कि उपभोक्ता के अधिकार और उसकी मेहनत की कमाई का है। समाजसेवियों ने कहा कि त्योहार खुशियां बांटने के लिए हैं, ग्राहकों की जेब काटने के लिए नहीं।

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