Siddharthnagar News: याद किए गए आजादी के सच्चे सिपाही हबीबुल्लाह, अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ डटकर लड़े

Siddharthnagar News: आजादी के सच्चे सिपाही हबीबुल्लाह को याद किया गया। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ डटकर संघर्ष किया था।

Intejar Haider
Published on: 14 Aug 2026 2:19 PM IST
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Siddharthnagar News(Photo-Social Media)

Siddharthnagar News: जंग-ए-आजादी में डुमरियागंज कस्बा निवासी एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. हबीबुल्लाह का योगदान हमेशा याद किया जाएगा। मातृभूमि के लिए मर मिटने को हर पल तैयार रहने वाले हबीबुल्लाह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ डटकर संघर्ष किया। फिरंगियों ने उन पर अनेकों बार जुल्म ढाए, कई बार उन्हें जेल में डाल दिया गया और कोड़ों से निर्मम पिटाई की गई, मगर उनके हौसले कभी नहीं डगमगाए।

जब देश पर गुलामी की जंजीरें कस चुकी थीं और स्वतंत्रता सेनानी मैदान-ए-जंग में उतर चुके थे, तब हबीबुल्लाह भी बिना किसी भय के संघर्ष में शामिल हो गए। उनके परिजन तुफैल अहमद बताते हैं कि वे सरदार वल्लभभाई पटेल से प्रेरित होकर जगह-जगह जनसभाओं के माध्यम से लोगों में आजादी की अलख जगाते थे। अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज बुलंद करने में वे हमेशा सबसे आगे रहते थे। सन 1941 के सत्याग्रह आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। जेल में उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं। कोर्ट में पेशी के समय जज ने 50 रुपये जमा करने पर रिहाई का प्रस्ताव दिया, लेकिन हबीबुल्लाह ने गर्व से कहा कि मैं अपने रुपयों से फिरंगियों को देश में राज नहीं करने दूंगा और बिना झिझक जेल जाने का फैसला किया।

भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उनका योगदान और अधिक बढ़ गया। अंग्रेजी हुकूमत ने 20 अगस्त 1942 को उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया और 11 नवंबर 1943 तक, यानी लगभग डेढ़ साल तक कैद में रखा। इस दौरान उनके परिवार पर भी अत्याचार किए गए। फिरंगियों ने उनके घर का सारा बर्तन और खाद्य सामग्री उठा ली, जिससे परिवार को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्व. हबीबुल्लाह की पत्नी कनीज जोहरा जीवन काल में अक्सर यह बताती थीं कि उनके पति न केवल आंदोलन में सक्रिय थे, बल्कि लोगों में राष्ट्रप्रेम का भाव भरने के लिए हर समय तत्पर रहते थे।

उनके अदम्य साहस और बलिदान ने डुमरियागंज के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से नाम दर्ज कराया। उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए शासन ने वर्ष 2008 में डुमरियागंज को नगर पंचायत का दर्जा देते समय वार्ड संख्या तीन, जहाँ उनका घर स्थित है, को आधिकारिक रूप से हबीबुल्लाह नगर वार्ड नाम दिया। यह सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक है। आज भी लोग स्व. हबीबुल्लाह को अदब से नमन करते हैं और उनके संघर्ष की कहानियां सुनकर गर्व महसूस करते हैं। वे न केवल डुमरियागंज के, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल हैं।

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वरिष्ठ संवाददाता, सिद्धार्थनगरSiddharthNagarIntezarHaider@newstracksite.vocalwire.com
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