Sitapur News: कानूनी कार्रवाई के बाद खाली हुआ सपा जिला कार्यालय, प्रशासन ने जारी किया था अल्टीमेटम

Sitapur News: सीतापुर में जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद समाजवादी पार्टी ने अपना जिला कार्यालय खाली कर दिया। नजूल जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में कलेक्टर न्यायालय के आदेश के बाद सपा ने कार्यालय की चाबी प्रशासन को सौंप दी।

Sami Ahmed
Published on: 20 Jun 2026 6:08 PM IST
Sitapur News: कानूनी कार्रवाई के बाद खाली हुआ सपा जिला कार्यालय, प्रशासन ने जारी किया था अल्टीमेटम
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Sitapur News: उत्तर प्रदेश के सीतापुर से इस वक्त की बड़ी सियासी खबर सामने आई है, जहां समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है।जिला प्रशासन और कानूनी कार्रवाई के दबाव के चलते समाजवादी पार्टी ने आखिरकार शहर के बीचों-बीच स्थित अपना जिला कार्यालय खाली कर दिया है। कलेक्टर न्यायालय से मिले सख्त अल्टीमेटम के बाद खुद सपा जिलाध्यक्ष ने दफ्तर का सामान निकालकर चाबी प्रशासन को सौंप दी है।

बताया जा रहा है कि लालबाग से आंख अस्पताल मुख्य मार्ग पर स्थित टाउन हॉल में बना समाजवादी पार्टी का जिला कार्यालय काफी समय से विवादों में था। जांच में सामने आया था कि सपा का यह कार्यालय नजूल (सरकारी) जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाया गया था। इस मामले की सुनवाई लंबे समय से कलेक्टर न्यायालय में चल रही थी।मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टर न्यायालय ने पिछले दिनों बड़ा आदेश जारी किया था। कलेक्टर कोर्ट ने समाजवादी पार्टी को अवैध कब्जे वाली जमीन और कार्यालय खाली करने के लिए 15 दिनों का नोटिस जारी किया था। आदेश में साफ चेतावनी दी गई थी कि यदि तय समय के भीतर कार्यालय खाली नहीं किया गया, तो जिला प्रशासन की ओर से बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी और अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाएगा।

बताते चलें कि अवैध कब्जों पर होने वाली कार्रवाई और प्रशासनिक सख्ती को देखते हुए समाजवादी पार्टी ने समय सीमा खत्म होने से पहले ही कार्यालय खाली करने का फैसला लिया। किसी भी तरह की किरकिरी से बचने के लिए सपा जिलाध्यक्ष ने आनन-फानन में पूरे कार्यालय को खाली करवा दिया।दफ्तर से पार्टी के बोर्ड, झंडे, दस्तावेज और सभी फर्नीचर हटा लिए गए हैं। कार्यालय पूरी तरह खाली करने के बाद सपा नेतृत्व ने जिला प्रशासन को भी लिखित रूप से इसकी जानकारी दे दी है।सालों पुराने इस कार्यालय का इस तरह खाली होना स्थानीय स्तर पर समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।जहां एक तरफ भाजपा और सत्ता पक्ष इसे कानून का राज बताते हुए सरकारी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की कार्रवाई बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी खेमे में इस कार्रवाई को लेकर हलचल तेज हो गई है।

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