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Sonbhadra: जनकल्याण से जुड़ें कंपनियां, औपचारिकता नहीं बदलाव का माध्यम बने CSR: डीएम चर्चित गौड़
Sonbhadra: शनिवार 30 मई को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी चर्चित गौड़ की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों को दो टूक संदेश दिया गया
Sonbhadra DM meeting News (Social Media)
Sonbhadra: कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) को केवल औपचारिक खर्च का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने का प्रभावी उपकरण बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है। शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी चर्चित गौड़ की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों को दो टूक संदेश दिया गया कि सीएसआर मद से संचालित होने वाली प्रत्येक गतिविधि की पूर्व सूचना और प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य रूप से प्राप्त करनी होगी। बिना अनुमति अथवा सूचना के संचालित कार्यों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में कार्यरत कंपनियां शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक उत्थान के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। इसके लिए आवश्यक है कि सभी गतिविधियां पारदर्शी, योजनाबद्ध और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर संचालित की जाएं। उन्होंने कहा कि सीएसआर का वास्तविक उद्देश्य समाज के कमजोर और वंचित वर्गों तक सुविधाएं पहुंचाना है, इसलिए कंपनियों को अपनी योजनाओं को जनहित से जोड़ते हुए प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करने होंगे।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रशासन का जोर
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सीएसआर के अंतर्गत प्रस्तावित अथवा संचालित प्रत्येक कार्यक्रम की जानकारी समय से जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही मुख्य विकास अधिकारी, उपायुक्त उद्योग तथा जिला सूचना कार्यालय को भी योजनाओं का पूरा विवरण दिया जाए, ताकि गतिविधियों की निगरानी और समन्वय बेहतर तरीके से किया जा सके।
उन्होंने कहा कि कई बार कंपनियों द्वारा किए गए सराहनीय कार्यों की जानकारी आम जनता तक नहीं पहुंच पाती, जिससे लाभार्थियों का दायरा सीमित रह जाता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए सभी कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोग इन योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता अभियानों को मिलेगी प्राथमिकता
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने विशेष रूप से स्वास्थ्य शिविरों, शैक्षिक कार्यक्रमों, कौशल विकास प्रशिक्षण, पर्यावरण संरक्षण अभियानों और जनजागरूकता गतिविधियों को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कंपनियां अपने संसाधनों और विशेषज्ञता का उपयोग कर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रभावी पहल करें, जिससे विकास का लाभ उन लोगों तक पहुंचे जो अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होने पर सीएसआर मद की राशि का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा और विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।
बिना अनुमति गतिविधियों पर नहीं मिलेगी मान्यता
बैठक में जिलाधिकारी ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। सीएसआर मद से संचालित होने वाले सभी कार्यक्रमों के लिए पूर्व सूचना और आवश्यक स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति संचालित गतिविधियों को प्रशासनिक मान्यता नहीं दी जाएगी। उन्होंने कंपनियों से अपील की कि वे नियमों का पालन करते हुए जनपद के समग्र विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन को प्राथमिकता दें।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी, अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) वागीश कुमार शुक्ला, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. पंकज राय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी अजय कुमार मिश्रा, अपर जिला सूचना अधिकारी विनय कुमार सिंह समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनपद में कार्यरत कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में सीएसआर गतिविधियों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।


