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Sonbhadra News: बिजली व्यवस्था पर ‘वर्टिकल वार’, संविदा कर्मियों की छंटनी से बढ़ा संकट
Sonbhadra News: सोनभद्र में बिजली कर्मियों ने जन-जागरण अभियान शुरू कर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग, निजीकरण और संविदा कर्मियों की छंटनी पर बड़ा संकट बताया।
बिजली व्यवस्था पर ‘वर्टिकल वार’, संविदा कर्मियों की छंटनी से बढ़ा संकट, किया जा रहा अलर्ट (Photo- Newstrack)
Sonbhadra News: सोनभद्र। उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर संघर्ष अब और तेज होता दिखाई दे रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने “जन-जागरण अभियान” के जरिए जनता, किसानों और उपभोक्ताओं को यह बताने का अभियान शुरू किया है कि पावर कॉर्पोरेशन की नई नीतियां भविष्य में बड़े बिजली संकट का कारण बन सकती हैं। संघर्ष समिति का आरोप है कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग और संविदा कर्मियों की लगातार छंटनी से बिजली व्यवस्था की जड़ें कमजोर होती जा रही हैं।
‘नई व्यवस्था’ से उपभोक्ता परेशान, दफ्तर-दफ्तर भटकने की नौबत
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को यह तक समझ नहीं आ रहा कि शिकायत या काम के लिए किस कार्यालय में जाएं। पहले जहां एक ही व्यवस्था में कई काम हो जाते थे, वहीं अब उपभोक्ताओं को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे आम जनता में नाराजगी बढ़ रही है।
संविदा कर्मियों की छंटनी से फॉल्ट सुधार कार्य प्रभावित
समिति ने आरोप लगाया कि वर्षों से बिजली व्यवस्था संभाल रहे अनुभवी संविदा कर्मियों को हटाए जाने से लाइन मरम्मत, फॉल्ट सुधार और रखरखाव कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। इसका सीधा असर बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में यह स्थिति और भयावह हो सकती है।
निजीकरण की ओर तेजी से बढ़ रहा प्रबंधन : संघर्ष समिति
संघर्ष समिति ने कहा कि नवंबर 2024 में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का फैसला लिया गया था, जिसका कर्मचारी लगातार लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे हैं। इसके साथ ही अब पश्चिमांचल और मध्यांचल में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर निजीकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
समिति के अनुसार सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, लखनऊ, अयोध्या और बरेली जैसे महत्वपूर्ण शहरों में नई व्यवस्था लागू की जा चुकी है, जिसके दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं।
जनप्रतिनिधियों ने भी जताई चिंता
संघर्ष समिति का दावा है कि कई जनप्रतिनिधियों ने भी इस व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई है और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। बावजूद इसके पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन चरणबद्ध तरीके से इसे लागू करता जा रहा है।
529वें दिन आंदोलन को और धार देने का आह्वान
निजीकरण विरोधी आंदोलन के 529 दिन पूरे होने पर प्रदेशभर के विभिन्न जनपदों और परियोजनाओं में विचार-विमर्श कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्थानीय पदाधिकारियों ने आंदोलन को और व्यापक व मजबूत बनाने का आह्वान किया।
संघर्ष समिति ने साफ कहा कि यह लड़ाई केवल बिजली कर्मियों की नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं, किसानों और पूरे समाज के हितों से जुड़ी हुई है। इसलिए जन-जागरण अभियान के माध्यम से लोगों को संभावित बिजली संकट के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ताकि समय रहते व्यापक जनसमर्थन तैयार किया जा सके।


