Sonbhadra News: बिजली घरों के निजीकरण पर कर्मचारी गुस्सा, काली पट्टी बांधकर करेंगे विरोध

Sonbhadra News: प्रदेश के बिजली कर्मी 13 मई को काली पट्टी बांधकर करेंगे विरोध प्रदर्शन, निजीकरण के फैसले को जनता और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताया।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 12 May 2026 5:52 PM IST
Electricity workers protest over privatization of power houses
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बिजली घरों के निजीकरण पर बिजली कर्मचारियों का विरोध (Photo- Newstrack)

Sonbhadra News: सोनभद्र। प्रदेश के ताप बिजली घरों के संचालन और रख-रखाव को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी के खिलाफ बिजली कर्मचारियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 13 मई को प्रदेशभर के बिजली कर्मी काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे और कार्यालय समय के बाद परियोजनाओं व कार्यस्थलों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संघर्ष समिति ने इसे बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को सौंपने का फैसला प्रदेश की जनता और बिजली कर्मियों दोनों के हितों के खिलाफ है।

सरकार और प्रबंधन का फोकस सुधार पर नहीं

समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों में कार्यरत कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर, अभियंता तथा संविदा कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। उनका कहना है कि जिन ताप बिजली घरों ने उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार हासिल किए, उन्हीं को अब निजी कंपनियों के हवाले करने की तैयारी की जा रही है। इससे साफ है कि सरकार और प्रबंधन का फोकस सुधार पर नहीं बल्कि निजीकरण पर है।

संघर्ष समिति के अनुसार जवाहरपुर ताप बिजली घर लगभग 14 हजार करोड़ रुपये तथा पनकी ताप बिजली घर करीब 8 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए हैं। यह धन प्रदेश की जनता की मेहनत की कमाई से खर्च हुआ है। ऐसे में अरबों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति को 25 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपना जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है।

बिजली कर्मियों ने यह भी सवाल उठाया कि ताप बिजली घरों की सामान्य आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है, ऐसे में पूरे संचालन काल के लिए निजी कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपना सरकारी क्षेत्र को कमजोर करने की साजिश जैसा प्रतीत होता है।

संघर्ष समिति ने मार्च 2023 से चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान बिजली कर्मचारियों पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग भी दोहराई। इसी क्रम में व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत शाहजहांपुर और बरेली में विरोध सभाएं आयोजित की गईं, जहां कर्मचारियों ने निजीकरण के खिलाफ आवाज बुलंद की।

विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद और राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने संबोधित करते हुए कहा कि बिजली क्षेत्र को निजी कंपनियों के हवाले करने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से पुरजोर विरोध किया जाएगा।

13 मई को विरोध प्रदर्शन

संघर्ष समिति ने बताया कि 13 मई को राजधानी लखनऊ स्थित शक्ति भवन पर अपराह्न 2 बजे बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में बिजली कर्मियों के शामिल होने की संभावना है।

Shashi kant gautam

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