Sonbhadra News: ऊर्जा निगमों में संविदाकर्मियों की बहाली की मांग तेज, जल्द समाधान की अपील

Sonbhadra News: संघर्ष समिति ने हटाए गए संविदा कर्मचारियों की बहाली, लंबित समझौतों के पालन और सुरक्षित कार्य वातावरण की मांग करते हुए जल्द समाधान की अपील की।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 30 July 2026 6:58 PM IST
Demand for reinstatement of contractors in energy corporations is fast, appeals for quick solutions
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ऊर्जा निगमों में संविदाकर्मियों की बहाली की मांग तेज, जल्द समाधान की अपील (Photo- Newstrack)

Sonbhadra News: सोनभद्र में ऊर्जा निगमों में संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार और ऊर्जा निगम प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा तेज कर दिया है। समिति ने स्पष्ट कहा है कि मार्च 2023 के आंदोलन के बाद हटाए गए सभी संविदा कर्मचारियों की तत्काल पुनर्बहाली की जाए, कर्मचारियों के खिलाफ की जा रही उत्पीड़नात्मक एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस ली जाए और ऊर्जा निगमों में भयमुक्त एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जाए। समिति ने चेताया कि यदि लंबित समझौतों और मांगों का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारियों का असंतोष और व्यापक हो सकता है।

समिति की ओर से गुरुवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि ऊर्जा मंत्री के साथ हुए समझौते तथा शासन और प्रबंधन द्वारा दिए गए निर्देशों का अब तक पूरी तरह पालन नहीं किया गया है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार को ऊर्जा निगमों में स्वस्थ और विश्वासपूर्ण माहौल बनाने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।

25 हजार कर्मचारियों की छंटनी से बढ़ी चिंता

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण की प्रक्रिया के दौरान पिछले दो वर्षों में लगभग 25 हजार संविदा कर्मचारियों की छंटनी की गई। इससे हजारों परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया, वहीं ऊर्जा निगमों में अनुभवी और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी भी बढ़ गई। समिति का कहना है कि लगातार बढ़ते उपभोक्ता, बिजली की बढ़ती मांग और नेटवर्क विस्तार के बीच अनुभवी कर्मचारियों को हटाना बिजली व्यवस्था के हित में नहीं है।

समिति ने कहा कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा में लाइन ब्रेकडाउन, फॉल्ट सुधार, आपातकालीन आपूर्ति बहाली और अन्य जोखिमपूर्ण कार्य चौबीसों घंटे चलते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की कमी से कार्यरत कर्मियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिससे कार्यस्थलों पर असंतोष और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।

पुनर्बहाली से लेकर सामाजिक सुरक्षा तक कई मांगें

संघर्ष समिति ने मांग की कि मार्च 2023 के आंदोलन के बाद हटाए गए सभी संविदा कर्मचारियों को तत्काल बहाल किया जाए। कर्मचारियों पर की जा रही अनुशासनात्मक और उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस लिया जाए तथा छंटनी पर रोक लगाकर निकाले गए कर्मचारियों को उनके अनुभव के अनुरूप दोबारा रोजगार दिया जाए।

इसके अलावा सरकार द्वारा गठित आउटसोर्स निगम में ऊर्जा विभाग के सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को शामिल करने, अतिरिक्त कार्य के लिए अनिवार्य ओवरटाइम भुगतान, फेसियल अटेंडेंस व्यवस्था समाप्त कर व्यावहारिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने, संविदा कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 55 से बढ़ाकर 60 वर्ष करने, दुर्घटना में घायल कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और सभी कर्मियों को गुणवत्तापूर्ण सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। समिति ने पूर्व कार्यदायी संस्थाओं के बकाया भुगतान समेत सभी लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण की भी मांग उठाई।

समाधान नहीं हुआ तो बढ़ सकता है आंदोलन

संघर्ष समिति ने कहा कि कर्मचारियों से बेहतर कार्य की अपेक्षा तभी की जा सकती है जब उन्हें रोजगार की सुरक्षा, सम्मानजनक व्यवहार, उचित पारिश्रमिक, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्य वातावरण मिले। समिति ने सरकार, ऊर्जा विभाग और ऊर्जा निगम प्रबंधन से तत्काल वार्ता कर सभी लंबित समझौतों और मांगों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की अपील की है।

समिति ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों के साथ हुए समझौतों का पालन नहीं किया गया और संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारियों में बढ़ता असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। इसकी पूरी जिम्मेदारी ऊर्जा निगम प्रबंधन और सरकार की होगी।

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