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Sonbhadra News: जीएसटी घोटाले का बड़ा खुलासा: फर्जी फर्मों से टैक्स चोरी, आरोपी की जमानत खारिज
Sonbhadra News: सोनभद्र में जीएसटी घोटाले का बड़ा खुलासा। फर्जी फर्मों और बोगस ITC के जरिए करोड़ों की टैक्स चोरी का आरोप। कोर्ट ने आरोपी आसिफ अली की जमानत अर्जी खारिज की।
Sonbhadra News(Photo-Social Media)
Sonbhadra News: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में फर्जी फर्मों के माध्यम से किए जा रहे जीएसटी घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। राज्य कर विभाग और एसआईटी की जांच में अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था। मामले में गिरफ्तार डाला निवासी आसिफ अली पर आरोप है कि उसने कई व्यापारियों के जीएसटी खातों का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पास ऑन की और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सत्र न्यायाधीश रामसुनौल सिंह की अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने माना कि यह मामला साधारण वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है।
एकाउंटेंट की नौकरी से सीखा पूरा खेल
जांच एजेंसियों के अनुसार, आसिफ अली पहले सेल टैक्स से जुड़े एक अधिवक्ता के यहां एकाउंटेंट के रूप में कार्य करता था। वहीं से उसने जीएसटी पोर्टल, रिटर्न फाइलिंग और तकनीकी प्रक्रियाओं की बारीकियां सीखी थीं। आरोप है कि इसी जानकारी का इस्तेमाल कर उसने फर्जीवाड़े का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। एसआईटी जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपनी फर्म “डीके एसोसिएट” के अलावा कई अन्य फर्मों के जीएसटी खातों में बिना अनुमति अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जोड़ लिया था। इसके बाद उन्हीं खातों का उपयोग कर फर्जी लेन-देन और बोगस आईटीसी का खेल शुरू किया गया।
कारोबारी के खाते से किया गया फर्जी लेन-देन
मामले में कारोबारी मोहम्मद हुसैन का बयान भी जांच के लिए अहम माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि वह सरिया और शटरिंग का कारोबार करते हैं और व्यवसाय के लिए उन्होंने जीएसटी नंबर बनवाया था। रिटर्न फाइल कराने के लिए वह एक अधिवक्ता के संपर्क में थे। इसी दौरान अधिवक्ता के यहां काम कर रहे आसिफ अली ने कथित रूप से उनकी जानकारी के बिना जीएसटी खाते में अपनी ईमेल आईडी जोड़ ली। बाद में उनके खाते से कई संदिग्ध लेन-देन किए गए। जब कारोबारी को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने विरोध दर्ज कराया और थाने में शिकायत भी दी। आरोप है कि बाद में समझौते का दबाव बनाकर मामले को शांत कराने की कोशिश की गई।
दूसरी फर्मों में भी फर्जी आईटीसी पास ऑन करने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि “ऑल सॉल्यूशन” नामक फर्म के प्रोपराइटर आदर्श कुमार सिंह ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उनकी फर्म में भी बिना अनुमति मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी बदल दिए गए थे। इसके जरिए फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पास ऑन किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 में करीब 1.20 करोड़ रुपये और वर्ष 2023-24 में लगभग 2.32 करोड़ रुपये की संदिग्ध आईटीसी ट्रांसफर किए जाने के प्रमाण मिले हैं। अब तक की जांच में केवल आसिफ अली से जुड़े नेटवर्क के जरिए लगभग 70 लाख रुपये की जीएसटी चोरी की पुष्टि हो चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
एसआईटी को मिल रहे कई और अहम सुराग
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी फर्मों के संचालन में किन लोगों ने तकनीकी और वित्तीय सहयोग दिया। कई व्यापारिक दस्तावेज, बैंक खाते और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित जीएसटी घोटाले में कई और नाम सामने आ सकते हैं। आर्थिक अपराध की इस बड़ी परत खुलने के बाद व्यापारिक जगत में भी हड़कंप मचा हुआ है।


