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Sonbhadra News: इलाज के दौरान बच्ची और महिला की मौत से उठे सवाल, डीएम ने तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
Sonbhadra News: सोनभद्र में उपचार के दौरान बच्ची और महिला की मौत के मामलों में परिजनों के आरोपों पर डीएम ने संज्ञान लिया है। दोनों अस्पतालों की जांच के आदेश दिए गए हैं।
इलाज के दौरान बच्ची और महिला की मौत से उठे सवाल, डीएम ने तीन दिन में मांगी रिपोर्ट (Photo- Newstrack)
Sonbhadra News: उपचार के दौरान मासूम बच्ची और एक महिला की मौत के मामलों में परिजनों की ओर से लगाए गए लापरवाही के आरोपों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने संज्ञान लिया है। उनके निर्देश पर मुख्य चिकित्साधिकारी ने दोनों प्रकरणों की निष्पक्ष जांच के लिए अलग-अलग तीन सदस्यीय समितियां गठित की हैं। समितियों को संबंधित तथ्यों और अभिलेखों की पड़ताल कर तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इंजेक्शन लगाते समय मासूम ने तोड़ा दम
पहला मामला राबर्ट्सगंज स्थित नेशनल हॉस्पिटल का है। चुर्क थाना क्षेत्र के राबर्ट्सगंज निवासी करीब 2.5 वर्षीय बच्ची शगुन की दो सितंबर को उपचार के दौरान इंजेक्शन लगाए जाने के समय मौत हो गई थी। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में उपचार के दौरान लापरवाही का आरोप लगाया था। मामला दैनिक समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लिया।
डीएम के निर्देश पर मुख्य चिकित्साधिकारी ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. प्रेमनाथ, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. कीर्ति आजाद बिन्द और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राबर्ट्सगंज के प्रभारी चिकित्साधिकारी डाॅ. गुरू प्रसाद को शामिल किया गया है।
समिति को प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों, उपचार संबंधी अभिलेखों और उपलब्ध दस्तावेजों की गहनता से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। तीन दिन में रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत, लापरवाही के आरोप
दूसरा मामला कम्हारी, राबर्ट्सगंज स्थित जीवनदीप हॉस्पिटल का है। खैराही निवासी संजय की 27 वर्षीय पत्नी रविता की दो सितंबर को ऑपरेशन के दौरान उपचार के बीच मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए। मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
इसके बाद गठित जांच समिति में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं नोडल अधिकारी पंजीयन निजी चिकित्सालय डाॅ. गुलाब शंकर, जिला संयुक्त चिकित्सालय की गाइनोकोलॉजिस्ट डाॅ. मोनिका सिंह तथा एनेस्थेटिक डाॅ. राजेश कुमार सिंह को शामिल किया गया है।
जांच रिपोर्ट से साफ होगा मौत का कारण और जिम्मेदारी
दोनों मामलों में जांच समितियां उपचार से संबंधित दस्तावेजों, चिकित्सकीय प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्यों की पड़ताल करेंगी। प्रशासन का रुख स्पष्ट है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। तीन दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मासूम बच्ची और महिला की उपचार के दौरान हुई मौत के मामलों में जिलाधिकारी के सीधे हस्तक्षेप से स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल बढ़ गई है। अब निगाहें जांच समितियों की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों मौतों के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या रहे और परिजनों की ओर से लगाए गए लापरवाही के आरोपों में कितनी सच्चाई है।


