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Sonbhadra News: बिजली व्यवस्था पर गहराया संकट, संविदाकर्मियों की वापसी और उत्पीड़न खत्म करने की मांग
Sonbhadra News: सोनभद्र में बिजली व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। 25 हजार संविदाकर्मियों की वापसी और कथित उत्पीड़न समाप्त करने की मांग मुख्यमंत्री से की गई है। कर्मचारियों और संगठनों ने बिजली सेवाओं पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।
Sonbhadra News(Photo-Social Media)
Sonbhadra News: प्रदेश में बढ़ती गर्मी और रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही बिजली की मांग के बीच विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने राज्य सरकार का ध्यान बिजली व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर आकर्षित किया है। रविवार को समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि हटाए गए संविदा कर्मियों की सेवाएं बहाल की जाएं और बिजली कर्मियों के खिलाफ लंबित कार्रवाई समाप्त की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति मिल सके।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि बिजली वितरण कंपनियों में चल रही पुनर्गठन और निजीकरण संबंधी प्रक्रियाओं के कारण बड़ी संख्या में अनुभवी संविदा कर्मियों को कार्य से अलग कर दिया गया है। उनका दावा है कि पिछले डेढ़ वर्ष में 25 हजार से अधिक कर्मियों के हटने से विद्युत तंत्र की कार्यक्षमता प्रभावित हुई है।
समिति के अनुसार, गर्मी के मौसम में बिजली की खपत तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे समय में सब-स्टेशनों, ट्रांसफार्मरों और विद्युत लाइनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे तकनीकी खराबियों की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इन खराबियों को समय पर दूर करने के लिए प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मचारियों की आवश्यकता होती है, लेकिन कर्मचारियों की कमी से मरम्मत कार्य और उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण में विलंब हो रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि संविदा कर्मियों की संख्या में भारी कमी आने से फील्ड स्तर पर कार्य प्रभावित हुआ है। लाइन अनुरक्षण, फॉल्ट सुधार और आपूर्ति बहाली जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर इसका असर दिखाई दे रहा है। इससे उपभोक्ताओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। समिति ने मार्च 2023 के आंदोलन के बाद हुए समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय बिजली कर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई वापस लेने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक अधिकांश मामलों में निर्णय लंबित है। इससे कर्मचारियों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
संघर्ष समिति का कहना है कि प्रदेश के बिजली कर्मियों ने हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। भीषण गर्मी के दौरान रिकॉर्ड बिजली मांग को पूरा करने से लेकर महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने तक, कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने उम्मीद जताई कि 15 जून को प्रस्तावित समीक्षा बैठक में सरकार बिजली व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सकारात्मक निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि अनुभवी संविदा कर्मियों की वापसी और लंबित मामलों के निस्तारण से विद्युत तंत्र अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा तथा उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।


