Sonbhadra News: 6 हजार पेड़ों की कटाई के विरोध में जनआंदोलन का ऐलान, 'पेड़ हैं तो प्राण हैं'

Sonbhadra News: सोनभद्र में 6 हजार पेड़ों की प्रस्तावित कटाई के विरोध में जनआंदोलन का ऐलान किया गया। 'पेड़ हैं तो प्राण हैं' के नारों के साथ लोगों ने हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की मांग उठाई।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 10 July 2026 4:14 PM IST
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Sonbhadra News(Photo-Social Media)

Sonbhadra News: जनपद के नगवां विकासखंड के सोमा ग्राम पंचायत में शुक्रवार को पर्यावरण संरक्षण को लेकर आयोजित कार्यक्रम जनजागरण का केंद्र बन गया। किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा के नेतृत्व में चलाए जा रहे "पेड़ है तो प्राण है" अभियान के तहत सैकड़ों ग्रामीणों के बीच फलदार पौधों का वितरण किया गया। इस दौरान लोगों ने पौधों की देखभाल परिवार के सदस्य की तरह करने और हर हाल में हरियाली बचाने का सामूहिक संकल्प लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संदीप मिश्रा ने कहा कि "पेड़ है तो प्राण है" अभियान अब जनभागीदारी से जुड़ा एक व्यापक जनआंदोलन बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं के नाम पर क्षेत्र के जल, जंगल, जमीन, पेड़, पानी और पहाड़ों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पेड़ों की कटाई पर उठाए सवाल

संदीप मिश्रा ने मुख्यमंत्री से मांग की कि 24 दिसंबर 2024 के शासनादेश की भावना के अनुरूप बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से एक निजी कंपनी को करीब छह हजार पेड़ काटने की अनुमति दी गई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

कटाई नहीं रुकी तो होगा बड़ा आंदोलन

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पेड़ों की कटाई नहीं रोकी गई तो किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा पूरे जनपद में व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक संगठन का नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है और इसके लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।

ग्रामीणों ने जताया विरोध

ग्रामीण मुखलाल चेरो ने कहा कि यदि क्षेत्र में कंपनी स्थापित हुई तो प्रदूषण बढ़ेगा और इसका सीधा असर स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य, खेती और पर्यावरण पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपने जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। बिंदु खरवार ने कहा कि आदिवासी समाज का जीवन जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। यदि इन पर संकट आया तो ग्रामीण चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सोनभद्र से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा। कार्यक्रम में राकेश यादव, मुखलाल चेरो, बिंदु खरवार, बासमती खरवार, हीरावती चेरो, आकाश चौहान, शत्रुघ्न, बीना, दिनेश चेरो, विजय चौहान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने पौधों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए मिलकर काम करने का संकल्प दोहराया।

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