Sonbhadra News: डेटा सेंटर के बहाने निजी कंपनियों की एंट्री, पैरेलल लाइसेंस पर संघर्ष समिति का विरोध

Sonbhadra News: सोनभद्र में बिजली वितरण में निजी कंपनियों की एंट्री को लेकर संघर्ष समिति ने विरोध जताया। पैरेलल लाइसेंस के मुद्दे पर विरोध तेज हुआ।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 12 Aug 2026 6:59 PM IST
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Sonbhadra News(Photo-Social Media)

Sonbhadra News: उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण को लेकर एक बार फिर विरोध तेज हो गया है। बुधवार को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने नोएडा स्थित डेटा सेंटर पार्क में बिजली आपूर्ति एवं वितरण के लिए अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस स्टेप-इलेवन लिमिटेड तथा अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड द्वारा पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस के लिए आवेदन किए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। समिति ने इसे प्रदेश में बैकडोर से बिजली निजीकरण की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का गंभीर प्रयास बताते हुए कहा कि बिजली कर्मचारी, किसान और उपभोक्ता मिलकर इसका पुरजोर विरोध करेंगे।

समिति का कहना है कि बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय यदि बड़े और अधिक राजस्व देने वाले उपभोक्ताओं, खासकर डेटा सेंटर जैसे अत्यधिक बिजली खपत वाले प्रतिष्ठानों को निजी कंपनियों के पैरेलल लाइसेंस के जरिए सरकारी वितरण व्यवस्था से अलग किया गया तो इसका सीधा आर्थिक नुकसान सरकारी वितरण निगमों को होगा। सबसे अधिक राजस्व वाले पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम से बड़े और लाभकारी उपभोक्ताओं के निकलने पर उसके राजस्व आधार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और वित्तीय स्थिति कमजोर होगी।

'मुनाफा निजी, बोझ सरकारी’ की नीति का विरोध

संघर्ष समिति ने कहा कि निजी कंपनियां सरकारी नेटवर्क का उपयोग करते हुए लाभकारी उपभोक्ताओं को चुनने की स्थिति में आ सकती हैं। इससे सरकारी वितरण कंपनियों के पास कम लाभ वाले और सामाजिक दायित्व वाले उपभोक्ताओं का भार बढ़ जाएगा। समिति ने इसे ‘मुनाफा निजी, बोझ सरकारी’ की नीति करार दिया है। समिति के मुताबिक अडानी समूह की कंपनियां पश्चिमांचल से पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस के माध्यम से प्रवेश की शुरुआत कर रही हैं। इसे केवल नोएडा के एक डेटा सेंटर तक सीमित मामला मानना भूल होगी। समिति को आशंका है कि इसके जरिए भविष्य में उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों, विशेषकर मध्यांचल सहित पूरे प्रदेश में निजी कंपनियों के बिजली वितरण क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता खुल सकता है।

पैरेलल लाइसेंस को बताया निजीकरण का पिछला दरवाजा

समिति ने कहा कि यदि इस प्रकार के लाइसेंस को अनुमति मिली तो आगे बड़े औद्योगिक, वाणिज्यिक और अन्य लाभकारी उपभोक्ताओं को सरकारी वितरण कंपनियों से अलग कर निजी कंपनियों को सौंपने का रास्ता खुल जाएगा। यह क्रमिक और बैकडोर निजीकरण की दिशा में कदम होगा। संघर्ष समिति ने कर्नाटक और हरियाणा में पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस के मुद्दे पर निजी कंपनियों को हुए विरोध और कठिनाइयों का भी हवाला दिया। समिति का कहना है कि वहां की परिस्थितियों के बाद अब उत्तर प्रदेश में पिछले दरवाजे से बिजली वितरण क्षेत्र में प्रवेश की कोशिश की जा रही है।

स्मार्ट मीटरिंग और उपभोक्ता डेटा को लेकर चिंता

समिति ने कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि स्मार्ट मीटर के क्षेत्र में कार्यरत इंटेली स्मार्ट को अडानी समूह द्वारा अधिग्रहित किया जा चुका है, जबकि पोलारिस के अधिग्रहण की दिशा में भी प्रक्रिया चल रही है। समिति इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रही है। संघर्ष समिति ने सवाल उठाया कि यदि स्मार्ट मीटरिंग कंपनियों का स्वामित्व बड़े निजी बिजली कारोबारियों के साथ जुड़ता है और साथ ही पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस भी दिए जाते हैं तो क्या स्मार्ट प्रीपेड मीटर को भविष्य के बिजली निजीकरण की आधारभूत शर्त बनाने की तैयारी की जा रही है। समिति ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के माध्यम से उपभोक्ताओं और बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़ा विशाल डेटा, बिलिंग तथा राजस्व संग्रह की पूरी प्रणाली निजी कंपनियों के प्रभाव क्षेत्र में जाने का खतरा है। इसलिए पूरे मामले की पारदर्शी और सार्वजनिक जांच जरूरी है।

विद्युत नियामक आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल

संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति के अनुसार संबंधित कंपनी ने 5 अगस्त 2026 को पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस के लिए आवेदन किया, लेकिन आवेदन को आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने में विलंब किया गया और विज्ञापन जारी होने से महज दो दिन पहले इसे वेबसाइट पर डाला गया। समिति ने कहा कि अब आम जनता और संबंधित पक्षों से आपत्तियां एवं सुझाव मांगे गए हैं। बिजली जैसे सार्वजनिक महत्व के क्षेत्र में इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को जल्दबाजी और सीमित सार्वजनिक जानकारी के साथ आगे बढ़ाना गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है तो आवेदन से लेकर सार्वजनिक सूचना तक हर चरण की जानकारी समय से सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? समिति ने आयोग से मांग की है कि आवेदन, सभी संलग्न दस्तावेज, प्रस्तावित क्षेत्र, संबंधित उपभोक्ताओं का विवरण, नेटवर्क उपयोग की शर्तें, राजस्व प्रभाव और सरकारी वितरण निगम पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव को सार्वजनिक किया जाए।

सड़क से आयोग तक आंदोलन की चेतावनी

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि संघर्ष केवल बयान जारी करने तक सीमित नहीं रहेगा। समिति सड़क से लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग तक हर स्तर पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी। बिजली का निजीकरण चाहे सीधे किया जाए या पैरेलल लाइसेंस, फ्रेंचाइजी, समानांतर वितरण अथवा किसी अन्य नाम से—समिति उसका विरोध करेगी। समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था किसी निजी कंपनी के मुनाफे का साधन नहीं है। करोड़ों उपभोक्ताओं की सेवा, किसानों को बिजली उपलब्ध कराना, सामाजिक दायित्व निभाना और प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक बिजली पहुंचाना सरकारी वितरण निगमों की जिम्मेदारी है। केवल लाभकारी उपभोक्ताओं को निजी कंपनियों को सौंपना सरकारी निगमों की आर्थिक स्थिति कमजोर कर सकता है।

संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश सरकार और विद्युत नियामक आयोग से नोएडा डेटा सेंटर के लिए प्रस्तावित पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस की प्रक्रिया तत्काल रोकने, पूरे मामले की सार्वजनिक एवं निष्पक्ष समीक्षा कराने और प्रदेश में किसी भी रूप में बैकडोर निजीकरण को अनुमति न देने की मांग की है। समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि बिजली कर्मचारी, किसान और उपभोक्ता एकजुट हैं। उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को निजी कंपनियों के मुनाफे के लिए गिरवी नहीं रखने दिया जाएगा। बैकडोर निजीकरण के खिलाफ संघर्ष को और तेज किया जाएगा।

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