Sonbhadra News: सोनभद्र पंप परियोजनाओं पर हाईकोर्ट सख्त, अडानी समेत कई कंपनियों को नोटिस

Sonbhadra News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोनभद्र की पंप स्टोरेज परियोजनाओं पर सख्त रुख अपनाया, कहा- पर्यावरणीय मंजूरी के बिना कोई काम शुरू नहीं होगा।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 11 May 2026 10:16 PM IST
High Court notices several companies including Sakht, Adani on Sonbhadra pump projects
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सोनभद्र पंप परियोजनाओं पर हाईकोर्ट सख्त, अडानी समेत कई कंपनियों को नोटिस (Photo- Social Media)

Sonbhadra News: सोनभद्र। सोनभद्र में प्रस्तावित पंप स्टोरेज एवं जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चल रही सुनवाई अब बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गई है। न्यायालय ने पर्यावरणीय स्वीकृतियों, वन एवं सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा और परियोजना की वैधानिक प्रक्रिया को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित कंपनियों को भी पक्षकार बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।

6 मई 2026 को हुई सुनवाई में औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि फिलहाल केवल सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) मिलने के बाद ही विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) तथा अन्य कानूनी अनुमतियां प्राप्त की जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय मंजूरी सहित सभी आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां मिलने से पहले सोनभद्र में कोई भी परियोजना शुरू नहीं की जाएगी।

कंपनियों और विभागों को नोटिस

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रस्तावित परियोजनाओं से जुड़ी कंपनियों को पक्षकार बनाए जाने के आवेदन पर नोटिस जारी कर दिया। अधिवक्ता अभिलाषा पांडेय के अनुसार अदालत के निर्देश पर आबाड़ा वाटर बैटरी, अडानी ग्रुप, ग्रीनको एनर्जी, टोरेंट पावर, जेएसडब्ल्यू नियो, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड समेत कई कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है। इसके साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के वाराणसी एवं सारनाथ प्रखंड को भी जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।


न्यायालय ने सभी संबंधित पक्षों से छह सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। अगली सुनवाई भी छह सप्ताह बाद तय की गई है। हालांकि अदालत ने औद्योगिक विकास आयुक्त को फिलहाल व्यक्तिगत उपस्थिति से राहत दे दी है, लेकिन स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें फिर तलब किया जा सकता है।

पर्यावरणीय मंजूरी पर सरकार बैकफुट पर

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह स्वीकार किया कि केंद्र सरकार से अभी तक पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त नहीं हुई है। इसके बाद न्यायालय ने केंद्र के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राज्य पर्यावरण विभाग, केंद्रीय पुरातत्व विभाग, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा जिलाधिकारी सोनभद्र को शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए।

याचिकाकर्ताओं रवि प्रकाश चौबे और सत्य प्रताप सिंह का कहना है कि यह विवाद केवल पर्यावरणीय अनुमति का नहीं, बल्कि सोनभद्र के जंगलों, वन्यजीवों, प्राचीन गुफाओं, सांस्कृतिक धरोहरों और पूरे पारिस्थितिक संतुलन के संरक्षण से जुड़ा है। उनका तर्क है कि यदि परियोजनाओं को बिना व्यापक अध्ययन के मंजूरी दी गई तो इसका दूरगामी दुष्प्रभाव क्षेत्र की जैव विविधता और आदिवासी जीवन पर पड़ सकता है।

हाईकोर्ट पहले भी जता चुका है नाराजगी

इस मामले में न्यायालय लगातार राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जाहिर करता रहा है। 10 मार्च 2026 की सुनवाई में न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति अभदेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने सरकार से पूछा था कि परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति ली गई है या नहीं। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि ऐसी अनुमति आवश्यक नहीं है तो उसका स्पष्ट कानूनी आधार प्रस्तुत किया जाए।

इसके बाद 15 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई में न्यायालय ने पूर्व आदेशों के अनुपालन में देरी पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि “एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद संबंधित अधिकारी न्यायालय के आदेशों के प्रति गंभीर नहीं दिख रहे हैं।” उसी दौरान औद्योगिक विकास आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर परियोजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया गया था।

अधिकारी के अदालत से चले जाने पर भी सख्ती

4 मई 2026 की सुनवाई में न्यायालय ने उस समय और सख्त रुख अपनाया जब व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश के बावजूद संबंधित अधिकारी कार्यवाही के बीच अदालत परिसर छोड़कर चले गए। कैबिनेट बैठक का हवाला देकर छूट मांगी गई, लेकिन न्यायालय ने इसे स्वीकार नहीं किया और अगली तिथि पर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया।



इसके बाद 6 मई की सुनवाई में राज्य सरकार ने माना कि केंद्र से पर्यावरणीय अनुमति अभी नहीं मिली है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया कि परियोजना से जुड़े सभी विभाग और एजेंसियां अपने-अपने जवाब दाखिल करें।

पुरातात्विक और पर्यावरणीय पहलू भी जांच के दायरे में

सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रस्तावित क्षेत्र भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के विनियमित क्षेत्र में नहीं आता। हालांकि न्यायालय ने इस दावे पर संबंधित पक्षों को शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

जनहित याचिका संख्या 201/2026, गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट बनाम भारत संघ एवं अन्य में चल रही इस सुनवाई ने सोनभद्र की पंप स्टोरेज परियोजनाओं पर कानूनी निगरानी और अधिक बढ़ा दी है। अब निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत विभिन्न विभागों और कंपनियों के जवाबों के आधार पर आगे की दिशा तय करेगी।

Shashi kant gautam

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