Sonbhadra News: आरडी-एफडी के नाम पर 5.75 लाख की धोखाधड़ी, दंपती पर मुकदमे का कोर्ट ने दिया आदेश

Sonbhadra News: सोनभद्र में आरडी-एफडी के नाम पर 5.75 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट ने दंपती के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 1 Oct 2026 6:10 PM IST
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Sonbhadra News(Photo-Social Media)

Sonbhadra News: आरडी और एफडी के जरिए बेहतर रकम लौटाने का भरोसा देकर 5 लाख 75 हजार रुपये हड़पने के आरोप के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन/एसीजेएम, सोनभद्र अजय सिंह की अदालत ने प्रकरण को प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए अनपरा थानाध्यक्ष को आकाश कुमार सिंह और उनकी पत्नी श्वेता सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। अदालत ने की गई कार्रवाई से उसे अवगत कराने के लिए भी निर्देशित किया है।

आरडी के भरोसे से शुरू हुई कहानी, रकम जमा होने के बाद बदला रुख

मामला बीजपुर थाना क्षेत्र के सिरसोती, नकटू निवासी पंकज कुमार सिंह से जुड़ा है। पंकज कुमार सिंह ने अधिवक्ता अरुण कुमार सिंघल के माध्यम से न्यायालय में 173(4) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसमें आरोप लगाया गया कि आकाश कुमार सिंह पुत्र वीरेंद्र प्रताप सिंह और उनकी पत्नी श्वेता सिंह निवासी ग्राम चेतवा, थाना बीजपुर, जिला सोनभद्र पहले से परिचित थे। आरोप है कि दोनों उसके घर पहुंचे और श्वेता सिंह ने खुद को सिटी म्युचुअल बेनिफिट इंडिया लिमिटेड की अनपरा औड़ी मोड़ शाखा का एजेंट बताते हुए निवेश योजना की जानकारी दी। बताया गया कि चार साल की आरडी में हर महीने 10 हजार रुपये जमा करने पर अवधि पूरी होने के बाद 6 लाख 10 हजार 800 रुपये वापस मिलेंगे। इस भरोसे पर पंकज कुमार सिंह ने 31 जुलाई 2021 को 10 हजार रुपये नकद देकर आरडी शुरू कराई। आरोप है कि अनपरा स्थित शाखा कार्यालय में उससे 20-25 पन्नों पर हस्ताक्षर भी कराए गए।

दो लाख की एफडी भी कराई, तीन साल बाद रकम लौटाने का था दावा

प्रार्थना पत्र के मुताबिक इसके बाद 11 अगस्त 2021 को तीन साल के लिए दो लाख रुपये की एफडी भी कराई गई। यह रकम चेक के जरिए दी गई थी, जिसे भारतीय स्टेट बैंक की बभनी शाखा से आकाश कुमार सिंह ने प्राप्त किया। आरोप है कि एफडी की अवधि पूरी होने पर दो लाख रुपये के बदले 2 लाख 81 हजार रुपये भुगतान किए जाने का भरोसा दिलाया गया था। समय पूरा होने के बाद जब पंकज कुमार सिंह ने अपनी जमा रकम वापस मांगी तो कथित तौर पर पहले भुगतान जल्द कराने का आश्वासन दिया गया। आरोप है कि लगातार रकम मांगने पर रवैया बदल गया और गाली-गलौज के साथ जान से मारने की धमकी तक दी जाने लगी। प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि बाद में यह कहकर रकम लौटाने से पल्ला झाड़ लिया गया कि अब कंपनी ही नहीं चल रही है, इसलिए पैसा नहीं मिलेगा।

थाने से एसपी कार्यालय तक गुहार, फिर अदालत का दरवाजा

पंकज कुमार सिंह के मुताबिक मामले की शिकायत अनपरा थाने में की गई, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद 21 जुलाई 2026 को रजिस्टर्ड डाक से एसपी सोनभद्र को भी पूरे मामले की जानकारी दी गई। वहां से भी अपेक्षित कार्रवाई न होने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली। प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अरुण कुमार सिंघल ने अदालत के समक्ष मामले के तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अनपरा थाने से भी रिपोर्ट मंगाई गई, जिसमें प्रकरण में मुकदमा दर्ज नहीं होने की स्थिति सामने आई।

अदालत ने माना प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध

अदालत ने प्रार्थना पत्र, पुलिस रिपोर्ट और अधिवक्ता के तर्कों पर विचार करने के बाद प्रकरण को प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की श्रेणी में माना। एसीजेएम अजय सिंह की अदालत ने अनपरा थानाध्यक्ष को आकाश कुमार सिंह और श्वेता सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने तथा मामले की विधिवत विवेचना करने का आदेश दिया है। अदालत ने पुलिस को की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराने का भी निर्देश दिया है। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में आरोपों, रकम के लेन-देन, आरडी-एफडी से संबंधित दस्तावेजों और संबंधित संस्थान की भूमिका समेत अन्य बिंदुओं की पड़ताल करेगी। मामले में आगे की स्थिति विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों पर निर्भर करेगी।

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