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Sonbhadra News: दलित किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म और बेचने के आरोपित की दूसरी जमानत अर्जी मंजूर
Sonbhadra News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरी जमानत अर्जी मंजूर की। बचाव पक्ष ने धीमी सुनवाई, चार गवाहों की गवाही और आपराधिक इतिहास न होने की दलील दी।
दलित किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म और बेचने के आरोपित की दूसरी जमानत अर्जी मंजूर (Photo- Social Media)
Sonbhadra News: सोनभद्र। दलित किशोरी का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने और राजस्थान ले जाकर बेचने के आरोप से जुड़े मामले में मुख्य आरोपी संदीप कुमार जायसवाल को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की अदालत ने सात अक्टूबर 2026 को उसकी दूसरी जमानत अर्जी मंजूर कर ली। करीब 21 माह से जेल में निरुद्ध मुख्य आरोपी की पहली जमानत याचिका छह माह पहले 26 मार्च 2026 को खारिज हो गई थी। दूसरी अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मुकदमे की धीमी गति, अब तक केवल चार गवाहों की गवाही दर्ज होने और आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं होने समेत कई तर्क रखे।
घर से लापता हुई थी 16 वर्षीय किशोरी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला पन्नूगंज थाना क्षेत्र के एक गांव का है। गांव निवासी एक बुजुर्ग दलित व्यक्ति ने 10 दिसंबर 2024 को पन्नूगंज थाने में तहरीर देकर बताया था कि उसकी 16 वर्षीय बेटी 28 नवंबर 2024 की रात करीब 10 बजे घर से कहीं चली गई। परिजनों ने उसकी काफी खोजबीन की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। किशोरी अपने साथ मोबाइल फोन भी ले गई थी। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की।
विवेचना के दौरान संदीप कुमार जायसवाल पुत्र महेंद्र, निवासी सिल्थम पटना, थाना रामपुर बरकोनिया, जिला सोनभद्र समेत छह लोगों के नाम सामने आए। विवेचक ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद सभी छह आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया।
टेंट लगाने के दौरान हुआ था परिचय, फोन कर बुलाने का आरोप
पीड़िता के कथन के मुताबिक, मुख्य आरोपी संदीप कुमार जायसवाल टेंट लगाने का काम करता था। एक बार किशोरी के गांव में टेंट लगाने के दौरान दोनों का परिचय हुआ था। आरोप है कि इसी दौरान संदीप ने किशोरी को अपना मोबाइल नंबर दिया, जिसके बाद दोनों के बीच कभी-कभी फोन पर बातचीत होने लगी।
अभियोजन के अनुसार, 28 नवंबर 2024 की रात करीब 10 बजे संदीप ने फोन कर किशोरी को घर से बाहर बुलाया। आरोप है कि बाहर आने पर उसे जबरन गाड़ी में बैठा लिया गया और उसका मुंह बंद कर दिया गया। कथित तौर पर मुख्य आरोपी का एक दोस्त गाड़ी चला रहा था। किशोरी को सलखन ले जाया गया, जहां एक रात रुकने के दौरान उसके साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप है।
वाराणसी से राजस्थान ले जाकर बेचने का भी आरोप
मामले में आरोप लगाया गया कि अगले दिन किशोरी को एक महिला के घर ले जाया गया। इसके बाद मुख्य आरोपी संदीप कुमार जायसवाल और उक्त महिला पर किशोरी को वाराणसी से राजस्थान ले जाकर बेचने का आरोप लगा। पुलिस ने विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर संदीप समेत छह लोगों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और विचारण के आधार पर होना है।
धीमी सुनवाई और चार गवाहों की गवाही को बनाया आधार
मुख्य आरोपी की ओर से अधिवक्ता ओमप्रकाश पाल ने दूसरी जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष बचाव पक्ष रखा। अधिवक्ता की दलील थी कि मुकदमे की सुनवाई अत्यंत धीमी गति से चल रही है और अब तक केवल चार गवाहों की गवाही दर्ज हो सकी है। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह 22 दिसंबर 2024 से जेल में निरुद्ध है।
बचाव पक्ष ने अदालत को आश्वस्त किया कि जमानत मिलने पर आरोपी मुकदमे की सुनवाई में सहयोग करेगा और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। लंबे समय से जेल में निरुद्ध रहने, विचारण की धीमी गति और अब तक हुई गवाही को जमानत के पक्ष में प्रमुख दलीलों के रूप में रखा गया।
पहली जमानत खारिज होने के बाद दूसरी अर्जी मंजूर
दूसरी जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की अदालत ने संदीप कुमार जायसवाल को जमानत दे दी। इससे पहले 26 मार्च 2026 को उसकी पहली जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। दूसरी अर्जी स्वीकार होने से करीब 21 माह से जेल में बंद मुख्य आरोपी को राहत मिली है। हालांकि, जमानत मिलना आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है। मामले में आरोपों की सत्यता और आरोपियों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायालय में विचारण तथा साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद होगा।


