Sonbhadra News: संविदा बिजली कर्मियों का फूटा गुस्सा, सुरक्षा और सुविधाओं की उठी मांग

Sonbhadra News: सोनभद्र में संविदा बिजली कर्मियों ने बढ़ते कार्यभार, सुरक्षा संसाधनों की कमी और लंबित मांगों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 18 Jun 2026 8:36 PM IST
Sonbhadra News: संविदा बिजली कर्मियों का फूटा गुस्सा, सुरक्षा और सुविधाओं की उठी मांग
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Sonbhadra: Electricity Department News

Sonbhadra News: बिजली निगमों में कार्यरत संविदा कर्मियों की लगातार बिगड़ती कार्य परिस्थितियों को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने सरकार और ऊर्जा निगम प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर चिंता जताई है। समिति ने कहा कि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभाने वाले संविदा कर्मी आज भारी कार्यभार, असुरक्षित माहौल और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई प्रभावी पहल नहीं हो रही है।

संघर्ष समिति का कहना है कि बिजली व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे हजारों संविदा कर्मियों से लगातार अतिरिक्त कार्य लिया जा रहा है। पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की उपलब्धता न होने के कारण मौजूदा कर्मियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कई स्थानों पर उन्हें प्रतिदिन निर्धारित समय से कहीं अधिक घंटे काम करना पड़ रहा है, जबकि साप्ताहिक अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।

सुरक्षा संसाधनों की कमी से बढ़ रहा हादसों का खतरा

समिति ने कहा कि विद्युत क्षेत्र का कार्य अत्यंत जोखिमपूर्ण होता है। लाइन मरम्मत, फाल्ट सुधार, ट्रांसफार्मर और उपकेंद्रों पर काम करने वाले कर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। परिणामस्वरूप लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं और कई संविदा कर्मी अपनी जान तक गंवा चुके हैं। समिति ने इसे बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति बताया है।

25 हजार से अधिक कर्मियों की बहाली सहित कई मांगें उठाईं

संघर्ष समिति ने मांग की है कि निजीकरण और अन्य कारणों से हटाए गए 25 हजार से अधिक संविदा कर्मियों को तत्काल पुनः सेवा में लिया जाए। साथ ही रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती कर मौजूदा कर्मचारियों पर बढ़ रहे कार्यभार को कम किया जाए। समिति ने यह भी मांग की कि सभी संविदा कर्मियों से अधिकतम आठ घंटे ही कार्य लिया जाए तथा सप्ताह में एक दिन सवेतन अवकाश अनिवार्य रूप से दिया जाए।

ओवरटाइम भुगतान और सामाजिक सुरक्षा की भी मांग

समिति ने कहा कि निर्धारित समय से अधिक कार्य लेने अथवा अवकाश के दिन ड्यूटी कराने की स्थिति में ओवरटाइम का भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके अलावा सभी संविदा कर्मियों को गुणवत्तापूर्ण सुरक्षा उपकरण, नियमित प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। दुर्घटना की स्थिति में प्रभावित कर्मियों और उनके परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता, बीमा और सामाजिक सुरक्षा का लाभ भी दिया जाए।

संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि जो कर्मी दिन-रात कठिन परिस्थितियों में काम कर प्रदेशवासियों तक निर्बाध बिजली पहुंचाने का दायित्व निभा रहे हैं, उन्हें सम्मानजनक कार्य वातावरण, सुरक्षा और न्यायपूर्ण सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार और ऊर्जा निगम प्रबंधन से संविदा कर्मियों की समस्याओं पर तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए ठोस निर्णय लेने तथा लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करने की अपील की।

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