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Sonbhadra News: तीन दशक बाद भी नहीं बना स्थायी कोर्ट भवन, सोनभद्र के अधिवक्ताओं में बढ़ा आक्रोश
Sonbhadra News: सोनभद्र में तीन दशक बाद भी स्थायी न्यायालय भवन का निर्माण शुरू नहीं हुआ। अधिवक्ताओं ने शासन-प्रशासन से तत्काल काम शुरू कराने की मांग की।
Sonbhadra News: जिला गठन के तीन दशक से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी स्थायी जनपद एवं सत्र न्यायालय भवन का सपना पूरा नहीं हो सका है। न्यायालय भवन के निर्माण में लगातार हो रही देरी को लेकर अधिवक्ताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है। शनिवार को डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, सोनभद्र की बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए भवन निर्माण का काम तत्काल शुरू कराने की पुरजोर मांग की गई। अधिवक्ताओं ने कहा कि अब इंतजार की अवधि खत्म होनी चाहिए और शासन-प्रशासन को इस दिशा में निर्णायक कदम उठाना चाहिए।
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिवक्ताओं ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए स्थायी न्यायालय परिसर का होना बेहद जरूरी है। वर्षों से अस्थायी व्यवस्थाओं के बीच न्यायिक कार्य संचालित होने से अधिवक्ताओं और वादकारियों को विभिन्न स्तरों पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर जिले के दूरस्थ इलाकों से आने वाले वादकारियों के लिए पर्याप्त सुविधाओं का अभाव बड़ी समस्या बना हुआ है।
जिला बना, व्यवस्था बढ़ी, लेकिन स्थायी भवन नहीं मिला
पूर्व अध्यक्ष जगजीवन सिंह ने कहा कि सोनभद्र का गठन 4 मार्च 1989 को हुआ था। जिले के गठन के बाद से लगातार समय बीतता गया, लेकिन स्थायी जनपद एवं सत्र न्यायालय भवन की आवश्यकता पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि न्याय पाने के लिए आने वाले लोगों को सुविधाजनक और व्यवस्थित न्यायालय परिसर मिलना उनका अधिकार है। लंबे समय तक भवन निर्माण का मामला लंबित रहना गंभीर चिंता का विषय है।
पूर्व उपाध्यक्ष पवन कुमार सिंह ने कहा कि सोनभद्र भौगोलिक दृष्टि से विशाल जनपद है। यहां बड़ी आबादी निवास करती है और न्यायिक कार्यों का दायरा भी व्यापक है। ऐसे में आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्थायी न्यायालय परिसर की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
भूमि स्वीकृत होने के बाद भी निर्माण का इंतजार
अधिवक्ताओं ने बताया कि पंचमुखी पहाड़ी, रॉबर्ट्सगंज में स्थायी न्यायालय भवन के लिए भूमि स्वीकृत की जा चुकी है। इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होना समझ से परे है। अधिवक्ताओं का कहना था कि जब भूमि उपलब्ध है तो अब निर्माण की प्रक्रिया में किसी तरह की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों से प्रक्रिया में तेजी लाकर जल्द से जल्द निर्माण कार्य धरातल पर शुरू कराने की मांग की।
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के महामंत्री राजेंद्र कुमार यादव ने कहा कि स्थायी न्यायालय भवन का निर्माण केवल अधिवक्ताओं की सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर न्यायहित और जनहित से जुड़ा मामला है। उन्होंने उच्चाधिकारियों और संबंधित सक्षम प्राधिकारी से मांग की कि इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराकर निर्धारित समयसीमा में पूरा कराया जाए।
दूरदराज से आने वाले वादकारियों को भी मिले बेहतर सुविधा
बैठक में कहा गया कि सोनभद्र के दूरस्थ क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग न्यायालय में अपने मामलों की सुनवाई के लिए पहुंचते हैं। आधुनिक न्यायालय परिसर बनने से न केवल न्यायिक कार्यों का संचालन अधिक व्यवस्थित होगा, बल्कि अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और वादकारियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। अधिवक्ताओं ने साफ कहा कि अब स्थायी न्यायालय भवन को लेकर केवल कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद ही वर्षों पुरानी मांग को वास्तविक रूप दिया जा सकेगा।
बैठक में प्रदीप कुमार मौर्य, राजेश कुमार यादव, प्रेम प्रताप विश्वकर्मा, विमल प्रसाद सिंह, सुरेश सिंह कुशवाहा, द्वारिका नाथ नागर, आशुतोष देव पांडेय, हरिद्वार एडवोकेट, सुदेश कुमार, राम गुल्ली यादव, रमन कुमार, चतुर्भुज शर्मा, शैलेंद्र कुमार सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।


